अनूपपुर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शहडोल कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने कार्यालयों एवं घरों में उपयोग होने वाली प्लास्टिक की बोतलों का पुनः उपयोग कर उन्हें ड्रिप सिंचाई प्रणाली के रूप में अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक बोतलों को कचरे में फेंकने के बजाय पौधों की सिंचाई के लिए उपयोग में लाया जाए, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
कलेक्टर डॉ. सिंह ने बताया कि यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रभावी और व्यवहारिक कदम है। स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा अब तक 30 हजार से अधिक प्लास्टिक बोतलों का पुनः उपयोग कर उन्हें ड्रिप सिंचाई प्रणाली में लगाया जा चुका है। यह प्रयास प्लास्टिक कचरे को कम करने और जल संसाधनों के बेहतर उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है।
बॉटल ड्रिप मॉडल के माध्यम से पौधों को उनकी आवश्यकता के अनुसार धीरे-धीरे पानी उपलब्ध कराया जा सकता है। छोटे गमलों एवं क्यारियों के लिए बोतल के ढक्कन में बारीक छेद कर उसे पानी से भरकर उल्टा गाड़ा जा सकता है। वहीं बड़े पौधों के लिए बोतल के किनारों पर छोटे छेद कर उसे पौधे की जड़ों के पास स्थापित किया जा सकता है। इसके अलावा सूती धागे या कपड़े की पट्टी की सहायता से विक मॉडल तैयार कर लंबे समय तक बूंद-बूंद सिंचाई की व्यवस्था भी की जा सकती है।
जिला प्रशासन ने सभी विभाग प्रमुखों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों से अपने कार्यालयों और आवासीय परिसरों में इस मॉडल को अपनाने का आग्रह किया है। साथ ही विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून के अवसर पर बोतलों से तैयार ड्रिप सिंचाई व्यवस्था एवं पौधों के साथ अपने फोटो साझा कर इस जन-अभियान को सफल बनाने की अपील की है।
प्रशासन का संदेश है कि “प्लास्टिक का पुनः उपयोग करें, जल बचाएं और पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दें।” यह छोटी पहल न केवल प्लास्टिक प्रदूषण को कम करेगी, बल्कि पौधों के संरक्षण और जल की बचत में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।












Leave a Reply