अनूपपुर 9 जून 2026/ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी पहल प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के सफल 10 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर अनूपपुर जिले में विशेष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया गया। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से शुरू किए गए इस अभियान ने बीते एक दशक में सुरक्षित मातृत्व, संस्थागत प्रसव और गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व सेवाओं को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अभियान की वर्षगांठ पर जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अब एक्सटेंडेड प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाएं केवल प्रत्येक माह की 9 तारीख को ही नहीं, बल्कि 25 तारीख को भी प्रदान की जा रही हैं। जिला चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, आयुष्मान आरोग्य मंदिर तथा वीएचएसएनडी स्तर तक सेवाओं का विस्तार किया गया है, जिससे अधिक से अधिक महिलाओं को समय पर जांच एवं उपचार की सुविधा मिल सके।
विशेष शिविरों में प्रशिक्षित चिकित्सा अधिकारियों, महिला चिकित्सकों और स्त्री रोग विशेषज्ञों की देखरेख में गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच, सोनोग्राफी, आवश्यक टीकाकरण तथा स्तनपान संबंधी परामर्श प्रदान किया गया। साथ ही उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उनका आवश्यक चिकित्सीय प्रबंधन सुनिश्चित किया गया। महिलाओं को संतुलित आहार, स्वच्छता, नियमित व्यायाम और गर्भावस्था के दौरान आवश्यक सावधानियों की भी जानकारी दी गई।
अभियान के तहत आयोजित शिविरों में जिलेभर की 492 गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच की गई। जांच के दौरान 64 महिलाओं को हाई रिस्क प्रेगनेंसी (एचआरपी) श्रेणी में चिन्हित कर उनके लिए विशेष चिकित्सकीय निगरानी एवं आवश्यक उपचार की व्यवस्था की गई। इसके अतिरिक्त 50 महिलाओं की सोनोग्राफी जांच की गई, जबकि गंभीर एनीमिया से पीड़ित 4 महिलाओं को एफसीएम इंजेक्शन लगाए गए।
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि सभी गर्भवती माताओं को आयरन-फोलिक एसिड की गोलियां, आवश्यक औषधियां एवं स्वास्थ्य शिक्षा सामग्री निःशुल्क वितरित की गई। विभाग ने सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने के लिए गर्भवती महिलाओं से नियमित स्वास्थ्य जांच कराने तथा स्वास्थ्य संस्थानों में ही प्रसव कराने की अपील की है। अभियान की यह पहल मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार तथा स्वस्थ मातृत्व के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।












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