धरमपुरी। धार जिले की धरमपुरी जनपद पंचायत क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर फर्जी बिल और फर्जी फर्मों के जरिए सरकारी राशि के दुरुपयोग के आरोप सामने आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शासन द्वारा गांवों के विकास के लिए लाखों रुपए की राशि आवंटित की जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर विकास कार्य नजर नहीं आते।
ग्रामीणों के अनुसार पंचायतों के ऑनलाइन पोर्टल पर लाखों रुपए के भुगतान और खर्च दर्शाए जा रहे हैं, जबकि गांवों में सड़क, स्वच्छ पेयजल और मूलभूत सुविधाओं की स्थिति आज भी खराब बनी हुई है। आरोप है कि कई पंचायतों में बिना जीएसटी वाले बिल लगाकर भुगतान किया जा रहा है, जबकि शासन के नियमों के अनुसार जीएसटी युक्त बिलों के आधार पर ही राशि जारी होना चाहिए।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कई ऐसे लोगों और फर्मों के नाम पर बिल लगाए जा रहे हैं, जिनका पंचायत के कार्यों से कोई संबंध नहीं है। कुछ मामलों में निजी कंपनियों में कार्यरत लोगों के खातों में पंचायत कार्यों के नाम पर राशि ट्रांसफर होने की बात भी सामने आ रही है।
पेयजल व्यवस्था को लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि कई गांवों में वर्षों पुरानी पाइप लाइनें जर्जर हालत में हैं। कहीं पाइप लाइन सड़क के नीचे दबी हुई है तो कहीं नालियों और गटरों में पड़ी हुई है, बावजूद इसके पाइप लाइन मरम्मत के नाम पर लाखों रुपए खर्च दिखाए जा रहे हैं।
ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि पंचायतों में हुए विकास कार्यों और भुगतान की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा एक विशेष जांच समिति गठित कर गांवों में वास्तविक स्थिति का निरीक्षण किया जाए। लोगों का कहना है कि सरकारी धन का सही उपयोग हो और विकास कार्यों का लाभ आम जनता तक पहुंचे।
फर्जी बिलों के सहारे पंचायतों में लाखों के घोटाले का आरोप, विकास कार्यों पर उठे सवाल
