धार /- धार महू लोकसभा क्षेत्र की माननीय सांसद श्रीमती सावित्री ठाकुर जी ने आज नई दिल्ली में भारत सरकार के केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत जी से सौजन्य भेंट की। उन्होंने धार स्थित ऐतिहासिक एवं आस्था के केंद्र भोजशाला सरस्वती मंदिर में विराजमान रहीं माँ वाग्देवी की प्रतिमा, जो वर्तमान में लंदन के संग्रहालय में संरक्षित है, उसे पुनः भारत लाकर भोजशाला में स्थापित किए जाने हेतु पत्र सौंपकर आग्रह किया है।
इस अवसर पर श्रीमती सावित्री ठाकुर ने माननीय श्री शेखावत जी को धार आगमन कर ऐतिहासिक स्थल भोजशाला का अवलोकन करने हेतु भी आमंत्रित किया है जिससे भविष्य में यह मंदिर एक बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में व्यापक रूप से विकसित सकेगा। श्री शेखावत जी ने इस आग्रह को सहर्ष स्वीकार करते हुए आगामी जून माह में धार आगमन की सहमति प्रदान की है।
भेंट के दौरान केंद्रीय मंत्री श्री शेखावत जी ने बताया कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार देश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक धरोहरों को पुनः भारत लाने हेतु निरंतर कार्य कर रही है। उनके प्रयासों से विगत वर्षों में अनेक दुर्लभ एवं बहुमूल्य ऐतिहासिक प्रतिमाओं और धरोहरों को विदेशों से वापस भारत लाया गया है तथा इसी क्रम में माँ वाग्देवी की प्रतिमा को भी शीघ्र भारत वापस लाने के लिए केंद्र सरकार गंभीरता एवं प्रतिबद्धता के साथ प्रयासरत है।
श्रीमती सावित्री ठाकुर जी ने कहा कि भोजशाला केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था, श्रद्धा और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र है। न्यायालय द्वारा भोजशाला को हिंदू मंदिर घोषित किया जाना सनातन संस्कृति एवं सत्य की बड़ी विजय है।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी भी भोजशाला एवं माँ वाग्देवी की प्रतिमा की पुनर्स्थापना को लेकर निरंतर गंभीर प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि माँ वाग्देवी की प्रतिमा का पुनः भारत आगमन प्रत्येक सनातन प्रेमी के लिए गर्व एवं भावनात्मक आस्था का विषय है। यह केवल प्रतिमा की वापसी नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक अस्मिता और गौरव की पुनर्स्थापना का भी प्रतीक होगा।
श्रीमती सावित्री ठाकुर जी ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र एवं राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से माँ वाग्देवी की प्रतिमा शीघ्र ही भारत वापस आएगी तथा भोजशाला में पुनः विधिवत स्थापित होकर श्रद्धालुओं को दर्शन लाभ प्राप्त होगा।












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