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अनूपपुर जिला अन्तर्गत छतई , उमरदा ,मझौली ग्राम मे लगभग एक दशक पहले वेलस्पन कम्पनी ने पावर प्लांट हेतु जमीनें ली थीं ।‌ अब उसी जमीन पर अनूपपुर पावर प्लांट लगाने की कवायद चल रही है।
लेकिन प्रभावित गांव के लोगो का आरोप है कि बिना ग्राम सभा की सहमति के चारागाह और सार्वजनिक उपयोग की भूमि का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है।
कोतमा जनपद के ग्राम पंचायत मझौली की सरपंच सुश्री चंदा पनिका के साथ ग्रामवासियों के साथ कलेक्टर अनूपपुर श्री हर्षल पंचोली को ज्ञापन सौंपकर अनूपपुर थर्मल पावर प्लांट एवं प्रशासनिक दबाव का विरोध दर्ज कराया।

मझौली ग्रामसभा ने स्पष्ट कहा कि चारागाह और सार्वजनिक उपयोग की भूमि ग्राम की धरोहर है, जिसे किसी भी कीमत पर व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं दिया जाएगा।

ग्रामीणों की आपत्ति है कि --

ग्राम पंचायत की अधिकांश भूमि पहले ही औद्योगिक परियोजनाओं में जा चुकी है।

बची हुई चारागाह भूमि पशुपालकों, ग्रामीणों और आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण है।

ग्रामसभा ने तहसीलदार द्वारा भेजे गए पत्र के विषय को खारिज करते हुए भूमि हस्तांतरण का विरोध किया।

ग्रामवासियों ने अनूपपुर कलेक्टर से मांग की है कि --

  1. चारागाह एवं सार्वजनिक भूमि का संरक्षण किया जाए
  2. ब्लास्टिंग से क्षतिग्रस्त मकानों का सर्वे और मुआवजा दिया जाए
  3. बाहरी श्रमिकों का पुलिस सत्यापन हो4. गांव में CCTV और स्ट्रीट लाइट व्यवस्था की जाए
    5 . 50 बिस्तरों का अस्पताल स्थापित किया जाए
    6 स्थानीय युवाओं और महिलाओं को रोजगार व प्रशिक्षण दिया जाए
    7 . स्थायी हाट-बाजार और व्यापारिक कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जाए
    8 . कंपनी के पुराने वायदों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।

मझौली ग्रामसभा ने सर्वोच्च न्यायालय के जगपाल सिंह बनाम पंजाब राज्य (2011) फैसले का हवाला देते हुए सार्वजनिक भूमि के संरक्षण की मांग की है।

उन्होने अपील की है कि ग्रामसभा के अधिकारों, सार्वजनिक संपत्तियों और ग्रामीणों के हितों की रक्षा की जाए।