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अनूपपुर 14 जुलाई 2026- राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री अंतर सिंह आर्य ने जनजातीय युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपराओं एवं रीति-रिवाजों का संरक्षण करें तथा उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत उसकी सबसे बड़ी पहचान है। इस संस्कृति की संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सभी युवा आगे हैं और संकल्पित भाव के साथ अपनी संस्कृति को अवश्य बचाएं। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री आर्य आज कलेक्ट्रेट कार्यालय के नर्मदा सभागार में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। 

अध्यक्ष श्री आर्य ने कहा कि आज के युवा केवल नौकरी पाने की सोच तक सीमित न रहें, बल्कि कौशल विकास, नवाचार एवं स्वरोजगार के माध्यम से ऐसे उद्यमी बनें जो अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करा सकें। उन्होंने युवाओं से शिक्षा, तकनीकी दक्षता और आत्मनिर्भरता को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक युवा को देश के प्रति अपने कर्तव्यों का भी सदैव स्मरण रखना चाहिए। राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी, सामाजिक समरसता तथा संविधान में निहित मूल्यों का पालन प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनजातीय युवा अपनी प्रतिभा, परिश्रम और संस्कारों के बल पर समाज एवं राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

अध्यक्ष श्री आर्य ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा जनजातीय समुदाय के कल्याण एवं विकास के लिए अनेक जनहितकारी योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। उन्होंने जनजातीय युवाओं से आह्वान किया कि वे जागरूक होकर इन योजनाओं का अधिकतम लाभ प्राप्त करें तथा अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि जनजातीय युवा सदैव सजग एवं जागरूक रहें तथा धर्मांतरण, विवाद एवं भ्रामक आंदोलनों जैसी गतिविधियों से दूर रहें। उन्होंने युवाओं से शिक्षा, कौशल एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ आगे बढ़ते हुए अपने जिले, प्रदेश एवं देश का नाम रोशन करने का आह्वान किया। अंत में श्री आर्य ने सभी जनजातीय युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की भूमिका एवं कार्यों की जानकारी प्रदान की गई। बताया गया कि आयोग का गठन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338(ए) के तहत किया गया है। आयोग का प्रमुख उद्देश्य अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों का संरक्षण करना तथा उनके कल्याण के लिए संचालित शासकीय योजनाओं एवं व्यवस्थाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी करना है। इस दौरान बताया गया कि आयोग यह सुनिश्चित करता है कि अनुसूचित जनजाति वर्ग शासन एवं संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों और सुविधाओं से वंचित न रहे। इसके साथ ही आयोग को जांच संबंधी मामलों में सिविल न्यायालय के समान शक्तियां प्राप्त हैं, जिनका उपयोग आवश्यकतानुसार जांच एवं विधिसम्मत कार्यवाही के लिए किया जा सकता है।

युवा संवाद कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री अंतर सिंह आर्य ने तुलसी महाविद्यालय की छात्रा बिनु राठौर एवं रितिका सिंह तथा छात्र वीरेंद्र कुमार तिवारी, शिवा कुशवाहा, बृज कुमार सोनी, आईटीआई अनूपपुर के छात्र किशन कुमार कोल एवं लवकुश कोल सहित अन्य युवाओं से संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने जनजातीय समुदाय की समस्याओं एवं आवश्यकताओं, शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षकों एवं प्राध्यापकों की भूमिका, शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से प्राप्त लाभ, राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों, जनजातीय समाज के प्रति दायित्व तथा शिक्षा एवं कौशल विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर बिंदुवार एवं सार्थक चर्चा की। आयोग के अध्यक्ष ने युवाओं से शासकीय व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी, सुदृढ़ एवं जनहितैषी बनाने के लिए सुझाव भी आमंत्रित किए।

कार्यक्रम में मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री रामलाल रौतेल, कलेक्टर श्री हर्षल पंचोली, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती अर्चना कुमारी, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के कंसल्टेंट श्री राकेश कुमार दुबे, जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ के पूर्व जनपद अध्यक्ष श्री हीरा सिंह श्याम, विंध्य विकास प्राधिकरण के पूर्व उपाध्यक्ष श्री रामदास पुरी, सहायक आयुक्त सुश्री सरिता नायक सहित अन्य जनप्रतिनिधि, विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में युवा उपस्थित रहे ।