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अमरकंटक में स्वर्गीय अनिल माधव दवे के पुण्य स्मरण में रामघाट दक्षिण तट पर “नदी संवाद एवं संगोष्ठी” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने मां नर्मदा के संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और नदी स्वच्छता पर अपने विचार रखे।
मुख्य वक्ता अम्बिका तिवारी ने कहा कि अनिल माधव दवे पर्यावरण के लिए एक ऋषि थे, जिनका चिंतन व्यापक और दूरदर्शी था। उन्होंने कहा कि मां नर्मदा को स्वच्छ बनाए रखना हम सभी का नैतिक कर्तव्य है।
कृषि वैज्ञानिक एवं नर्मदा समग्र के जिला टोली सदस्य अनिल पटेल ने कहा कि यदि मानव समाज को प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखते हुए विकास करना है, तो भौतिक उन्नति के साथ अध्यात्मिक मूल्यों को अपनाना होगा। संयमित उपभोग, पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना ही सतत विकास का आधार है।
इतिहास विभाग के प्रोफेसर राकेश सोनी ने कहा कि अनिल जी के विचारों को स्मरण कर नदी स्वच्छता का संकल्प लेना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
सांसद प्रतिनिधि प्रकाश द्विवेदी ने कहा कि मां नर्मदा को दूषित करने के सबसे बड़े जिम्मेदार हम स्वयं हैं, इसलिए सभी को मिलकर इसे स्वच्छ बनाए रखने का संकल्प लेना चाहिए।
डॉ. कुंज बिहारी सोलखिया ने मां नर्मदा को साक्षात जीवन बताते हुए कहा कि सच्ची श्रद्धा और समर्पण से ही जीवन में सकारात्मकता आती है।
समाज विभाग के डॉ. धर्मेंद्र झरिया ने कहा कि सहायक नदियां मां नर्मदा की सहेलियां हैं। यदि हम नर्मदा से दूर हैं, तो अपने आसपास की नदियों को स्वच्छ रखना भी मां नर्मदा की सेवा के समान है।