📰 पूरी खबर:
उज्जैन। किसानों की फसलों को लगातार नुकसान पहुंचा रही नीलगायों की समस्या से निपटने के लिए वन विभाग ने विशेष अभियान शुरू करने की तैयारी कर ली है। जिले में पहली बार आधुनिक "बोमा तकनीक" के माध्यम से बड़ी संख्या में नीलगायों को सुरक्षित पकड़कर गांधी सागर अभयारण्य में स्थानांतरित किया जाएगा।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार पिछले कई सप्ताह से नीलगायों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही थी। इसके तहत विभिन्न क्षेत्रों का सर्वे कर उन स्थानों की पहचान की गई है जहां नीलगायों के बड़े झुंड नियमित रूप से देखे जाते हैं। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर अभियान के लिए उपयुक्त स्थल चिन्हित किए गए हैं।
अभियान के तहत एक विशेष घेराबंदी क्षेत्र तैयार किया जाएगा, जिसे बोमा तकनीक के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। इस संरचना का उद्देश्य नीलगायों को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित रूप से नियंत्रित क्षेत्र तक पहुंचाना है। इसके लिए बड़े क्षेत्र में मजबूत घेराबंदी और आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
वन विभाग का कहना है कि अभियान शुरू होने से पहले चयनित क्षेत्र में चारा और पानी की व्यवस्था की जाएगी, ताकि नीलगायें स्वाभाविक रूप से उस स्थान की ओर आकर्षित हों। कुछ दिनों तक उन्हें वहां के वातावरण के अनुकूल होने का समय भी दिया जाएगा।
नीलगायों की निगरानी के लिए ड्रोन तकनीक का उपयोग किया जाएगा। वहीं वन अमले और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से पारंपरिक तरीके अपनाकर झुंडों को निर्धारित क्षेत्र की ओर ले जाया जाएगा। इस पूरे अभियान में बड़ी संख्या में वनकर्मी, विशेषज्ञ और स्थानीय सहयोगी शामिल रहेंगे।
वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से किसानों को फसलों के नुकसान से राहत मिलेगी। साथ ही नीलगायों को सुरक्षित वातावरण में पुनर्वासित कर मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में भी मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों की टीम पहले ही अभियान की तैयारियों का जायजा ले चुकी है और विभाग जल्द ही इसे धरातल पर उतारने की तैयारी में जुटा हुआ है।