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मध्यप्रदेश में मानसून की आमद का इंतजार लंबा होता जा रहा है। प्रदेश में अब तक मानसून की औपचारिक एंट्री नहीं हुई है और मौसम विभाग के अनुसार 25 जून तक इसके पहुंचने की संभावना है। मानसून की देरी और कम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

प्रदेश में अब तक सामान्य से 44 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। हालात यह हैं कि 55 में से 45 जिले बारिश के मामले में पीछे चल रहे हैं। इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर संभाग भी कम बारिश की मार झेल रहे हैं।

पूर्वी मध्यप्रदेश के 24 जिलों में 65 प्रतिशत तक कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है। बारिश नहीं होने से खेत सूखे पड़े हैं और खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है। कई क्षेत्रों में किसानों द्वारा बोए गए सोयाबीन के बीज खराब होने का खतरा भी बढ़ गया है।

हालांकि शुक्रवार को राजगढ़, मैहर, दमोह और रीवा जिलों में प्री-मानसून बारिश देखने को मिली, जिससे लोगों को कुछ राहत मिली। वहीं शनिवार को भोपाल समेत 38 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

किसान अब आसमान की ओर टकटकी लगाए मानसून का इंतजार कर रहे हैं। यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो खेती-किसानी पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।

फिलहाल प्रदेशवासियों की नजरें मानसून की दस्तक पर टिकी हैं। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां तेज होंगी और किसानों को राहत मिलेगी।