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दक्षिण पन्ना वनमण्डल के रैपुरा वन परिक्षेत्र ने वर्ष 2026 के अग्नि मौसम में वन अग्नि प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है। विगत पाँच वर्षों में मार्च से मई माह के आंकड़ों के विश्लेषण से ज्ञात हुआ है कि इस वर्ष रैपुरा परिक्षेत्र में मात्र 41 फायर अलर्ट प्राप्त हुए, जबकि वर्ष 2022 से 2025 के दौरान औसत फायर अलर्ट संख्या लगभग 111 रही थी। इस प्रकार परिक्षेत्र ने अपने दीर्घकालीन औसत की तुलना में लगभग 63 प्रतिशत की कमी दर्ज करते हुए अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है।

इस उपलब्धि के पीछे वन विभाग द्वारा अपनाई गई बहुस्तरीय रणनीति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। परिक्षेत्र की सीमावर्ती बीटों सगौनी, रैपुरा, जमुनिया एवं रतनगांव में गहरी फायर लाइनों की समय पर कटाई एवं सफाई कराई गई तथा संवेदनशील क्षेत्रों में निरंतर पैदल एवं वाहन गश्त की गई। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप पड़ोसी वनमण्डलों की ओर से एक भी वन अग्नि रैपुरा परिक्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकी।

वन क्षेत्र से होकर गुजरने वाली रेलवे लाइन के किनारे विशेष अग्नि सुरक्षा प्रबंधन भी किया गया। रेलवे ट्रैक के दोनों ओर सूखी घास एवं ज्वलनशील पदार्थों की सफाई तथा नियंत्रित दहन (Controlled Burning) कराया गया। इसके परिणामस्वरूप रेलवे लाइन से सटे वन क्षेत्रों में कोई भी वन अग्नि घटना दर्ज नहीं हुई। साथ ही, त्वरित प्रतिक्रिया दल (Quick Response Team) को आधुनिक उपकरणों एवं वाहनों सहित लगातार सक्रिय रखा गया, जिससे प्राप्त प्रत्येक अग्नि सूचना पर शीघ्र कार्रवाई कर आग को प्रारंभिक अवस्था में ही नियंत्रित कर लिया गया।

वन अग्नि नियंत्रण में स्थानीय समुदायों की भागीदारी भी एक महत्वपूर्ण कारक रही। वन अमले द्वारा ग्राम सभाओं, जनसंवाद कार्यक्रमों एवं जागरूकता अभियानों के माध्यम से ग्रामीणों को वन अग्नि से होने वाले नुकसान एवं उसकी रोकथाम के उपायों के बारे में लगातार जागरूक किया गया। विशेष रूप से उन गांवों पर ध्यान केंद्रित किया गया जहां पूर्व वर्षों में अग्नि घटनाएं अधिक दर्ज होती थीं। परिणामस्वरूप इस वर्ष रैपुरा परिक्षेत्र में कोई भी बड़ी अथवा अनियंत्रित वन अग्नि घटना नहीं हुई।

वनमण्डलाधिकारी दक्षिण पन्ना ने इस उपलब्धि का श्रेय रेंज ऑफिसर विवेक जैन के नेतृत्व में रैपुरा परिक्षेत्र के समस्त मैदानी अमले के अथक प्रयासों, त्वरित प्रतिक्रिया दल, ग्राम वन समितियों तथा स्थानीय नागरिकों के सहयोग को दिया है। रैपुरा परिक्षेत्र की यह सफलता वन संरक्षण एवं सामुदायिक सहभागिता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।