📰 पूरी खबर:
अनूप कुमार शुक्ला
दक्षिण पन्ना के सलेहा वन परिक्षेत्र अंतर्गत पटना तमोली में ग्राम वन समिति की अनूठी पहल बनी गौरैया संरक्षण की मिसाल। कभी हर आंगन की पहचान रही गौरैया आज बदलते परिवेश और घटते प्राकृतिक आवासों के कारण अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है। ऐसे समय में दक्षिण पन्ना वन मंडल के सलेहा वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम पटना तमोली में ग्राम वन समिति अध्यक्ष अजय चौरसिया द्वारा वर्षों से की जा रही एक संवेदनशील पहल गौरैया संरक्षण की प्रेरक मिसाल बन गई है।
अजय चौरसिया बताते हैं कि कई वर्ष पहले उन्होंने अपने घर के एक कोने में एक गौरैया को तिनका-तिनका जोड़कर घोंसला बनाते देखा था। वह अपने भावी परिवार के लिए सुरक्षित आशियाना तैयार कर रही थी। लेकिन एक दिन दोपहर में वह अचानक पंखे से टकरा गई और उनकी आंखों के सामने तड़प-तड़प कर उसकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने उन्हें भीतर तक व्यथित कर दिया और तभी उन्होंने पक्षियों के लिए सुरक्षित घर बनाने का संकल्प लिया।
उन्होंने सबसे पहले टाट और गत्तों से घोंसले तैयार किए। बाद में प्लाईवुड से पक्षी घर बनवाए और फिर सूखी गोलाकार लौकी, जिसे स्थानीय भाषा में तुम्बी या तुमड़िया कहा जाता है, से 15 से 20 प्राकृतिक पक्षी घर स्थापित किए। कुछ ही समय में गौरैयाओं ने इन पक्षी घरों को अपना आशियाना बना लिया। तिनकों और पंखों से सजाकर इन घरों में उन्होंने अंडे दिए और देखते ही देखते हर पक्षी घर में दो से तीन नन्हे मेहमानों का आगाज़ होने लगा।
वर्षों से चल रही इस मुहिम के परिणामस्वरूप अब तक सैकड़ों नन्हे मेहमानों का जन्म इन पक्षी घरों में हो चुका है। गर्मी के मौसम में पानी और दाने की नियमित व्यवस्था किए जाने से गौरैया के साथ-साथ अनेक अन्य पक्षियों को भी राहत मिल रही है और उनकी प्यास बुझ रही है।
अजय चौरसिया का कहना है कि बदलती जीवनशैली ने इंसानों को कच्चे मकानों से पक्के भवनों तक पहुंचा दिया है, लेकिन इसी बदलाव ने गौरैया जैसे मानव बस्तियों के साथ रहने वाले पक्षियों से उनका प्राकृतिक आवास छीन लिया है। आज उन्हें घोंसला बनाने और अपने बच्चों के पालन-पोषण के लिए सुरक्षित स्थान नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में पक्षी घर उनके संरक्षण का एक सरल और प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।
वन मंडलाधिकारी श्री अनुपम शर्मा ने कहा कि गौरैया केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि हमारे आसपास के स्वस्थ पर्यावरण और जैवविविधता का महत्वपूर्ण संकेतक है। गौरैया जैसे छोटे पक्षी कीट नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखने में योगदान देते हैं। तेजी से बदलते परिवेश में इनके सुरक्षित आवासों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पटना तमोली में ग्राम वन समिति द्वारा किया जा रहा यह प्रयास जनभागीदारी आधारित संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो समाज में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और संरक्षण की भावना को मजबूत करता है।
इस पहल से प्रेरित होकर गांव के अनेक ग्रामीणों ने भी अपने घरों में पक्षी घर लगाए हैं तथा गर्मियों में पक्षियों के लिए पानी के सकोरे रखना शुरू किया है। परिणामस्वरूप क्षेत्र में पक्षी मित्रों की संख्या बढ़ रही है और प्रकृति संरक्षण के प्रति लोगों में संवेदनशीलता विकसित हो रही है।
एक गौरैया की दर्दनाक मृत्यु से शुरू हुई यह छोटी-सी पहल आज प्रकृति प्रेम, करुणा और संरक्षण की बड़ी कहानी बन चुकी है। पटना तमोली से उठी यह मुहिम संदेश देती है कि यदि हम अपने घरों और आंगनों में पक्षियों के लिए थोड़ी-सी जगह और थोड़ा-सा पानी छोड़ दें, तो न केवल गौरैया की चहचहाहट लौट सकती है, बल्कि प्रकृति के साथ हमारा आत्मीय रिश्ता भी और मजबूत हो सकता है।