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पवई नगर में स्थित ऐतिहासिक जगदीश स्वामी मंदिर में सोमवार को परंपरागत स्नान यात्रा धार्मिक श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर मंदिर के गर्भगृह में विराजमान भगवान जगदीश स्वामी, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की प्रतिमाओं को आसान पर विराजमान कर विधिवत स्नान कराया गया। इस पावन आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और ढोल नगाड़ों एवं जयकारों से नगर का वातावरण भक्तिमय हो गया।

मंदिर के पुजारी अंशुल अनूप पाठक ने जानकारी देते हुए बताया कि परंपरा अनुसार स्नान के बाद भगवान को लू लग जाती है, जिससे वे 15 दिन तक विश्राम करते हैं। इस अवधि में मंदिर के कपाट बंद रहते हैं और भगवान की सेवा विशेष रूप से ‘अनाशक्त अवस्था’ में की जाती है।स्नान यात्रा के दौरान भगवान को मिट्टी के छिद्रयुक्त परंपरागत घड़ों से स्नान कराया गया। बैंड-बाजे, ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ भगवान की जय-जयकार करते हुए श्रद्धालुओं ने नगर में प्रभु आगमन का स्वागत किया। मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी, और भगवान के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया ।

स्नान उपरांत भगवान को विश्राम हेतु विशेष शयन कक्ष में ले जाया गया और आरती कर प्रसाद वितरण किया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अब भगवान 15 दिन तक बीमार रहेंगे, जिन्हें ‘अनासक्ति पर्व’ कहा जाता है। इस दौरान मंदिर में विशेष सेवा और पूजन किया जाएगा ।
आगामी धार्मिक कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए पुजारी अंशुल पाठक ने बताया कि 14 जुलाई को पाठ-प्रसाद का आयोजन होगा,15 जुलाई को धूप और कपूर आरती की जाएगी, 16 जुलाई को नगर में भव्य रथ यात्रा निकाली जाएगी।

रथ यात्रा पवई की एक ऐतिहासिक परंपरा है, जिसमें भगवान जगदीश स्वामी रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण करते हैं। बैंड-बाजों, झांकियों, भक्तों की टोलियों और आकर्षक सजावट के बीच यह यात्रा धार्मिक आस्था और लोक परंपरा का संगम बन जाती है। इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय नागरिकों, युवाओं व सेवाभावी संस्थाओं द्वारा मिलकर उत्कृष्ट सहयोग प्रदान किया जाता है , स्थानीय प्रशासन पुलिस प्रशासन एवं नगर परिषद द्वारा भी व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभाई जाती है ।ओर सभी लोग रथयात्रा बारात में शामिल होते है