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शाजापुर! शासकीय और राजस्व भूमि के संरक्षण को लेकर प्रशासनिक दावों की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। शाजापुर जिले की गुलाना तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पिपलोदा इस्माइल में एक ऐसा ही गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ सरकारी जमीन पर धड़ल्ले से पक्का अतिक्रमण किया जा रहा है। तमाम शिकायतों के बाद भी जिम्मेदार अमला मूकदर्शक बना हुआ है। पीड़ित धर्मेंद्र परमार पिछले तीन वर्षों से लगातार इस अवैध निर्माण को रुकवाने के लिए कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, परंतु अब तक कोई ठोस धरातलीय कार्रवाई देखने को नहीं मिली है।
औपचारिकता बनकर रह गई पटवारी की जांच
मामले में हलका पटवारी रामचरण कराडा की कार्यप्रणाली को लेकर स्थानीय स्तर पर असंतोष देखा जा रहा है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि जब भी अतिक्रमण की शिकायत की जाती है, पटवारी द्वारा मौके पर पहुंचकर केवल एक 'पंचनामा रिपोर्ट' तैयार कर ली जाती है। इस कागजी औपचारिकता के बाद मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। स्थगन या किसी ठोस दंडात्मक कार्रवाई के अभाव में अतिक्रमणकारी बिना किसी व्यवधान के शासकीय भूमि पर पक्का निर्माण कार्य लगातार आगे बढ़ा रहे हैं।
विभागों के बीच उलझा अधिकार क्षेत्र
उच्चाधिकारियों और तहसीलदार को शिकायत किए जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। पीड़ित धर्मेंद्र परमार ने व्यवस्था की विसंगति को साझा करते हुए बताया कि जब इस विषय में तहसीलदार को अवगत कराया जाता है, तो उनकी ओर से कहा जाता है कि निर्माण कार्य रोकने की जिम्मेदारी पंचायत की है। वहीं, जब पीड़ित ग्राम पंचायत के पास पहुंचता है, तो वहां के जिम्मेदार अधिकारी इसे तहसीलदार के अधिकार क्षेत्र का मामला बताकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। दो विभागों के बीच आपसी समन्वय की इस कमी का सीधा लाभ अतिक्रमण करने वाले उठा रहे हैं।
नियम और व्यवस्था पर उठते प्रश्न
ग्राम पिपलोदा इस्माइल का यह पूरा घटनाक्रम कई गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़े करता है:
यदि मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता के तहत शासकीय भूमि का संरक्षण और अतिक्रमण हटाना राजस्व विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है, तो गुलाना तहसील क्षेत्र के इस मामले को पंचायत स्तर पर क्यों टाला जा रहा है?
तीन साल की लंबी अवधि में केवल पंचनामा तैयार करना और कोई वैधानिक कदम न उठाना, क्या मैदानी अमले की शिथिलता को नहीं दर्शाता?
फिलहाल, प्रशासनिक अनदेखी और लगातार हो रहे पक्के निर्माण के कारण ग्राम की शासकीय भूमि का अस्तित्व संकट में है। पीड़ित पक्ष ने अब जिले के वरिष्ठ अधिकारियों और जिला कलेक्टर से इस संवेदनशील मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच और अतिक्रमण मुक्त कार्रवाई की मांग की है।