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करीब दो साल पहले हुई एक कथित सड़क दुर्घटना में मौत का मामला अब फिर सुर्खियों में है। मृतक के बेटे ने इस पूरे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल उठाते हुए पुलिस अधीक्षक नीमच से मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

परिजनों का दावा है कि शव पर मिले चोटों के निशान और वाहन की स्थिति कथित सड़क दुर्घटना की कहानी से मेल नहीं खाते। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह वास्तव में सड़क हादसा था या फिर घटना के पीछे कोई और सच्चाई छिपी है? देखिए ये रिपोर्ट…

नीमच जिले के रतनगढ़ थाना क्षेत्र में करीब दो वर्ष पूर्व भैरूलाल रेगर की मौत एक कथित सड़क दुर्घटना में हुई थी। उस समय पुलिस ने मामले को सड़क हादसा मानते हुए कार्रवाई की थी, लेकिन अब मृतक के पुत्र रामरतन रेगर ने पूरे मामले पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रामरतन ने पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर मामले की दोबारा जांच कराने की मांग की है।

आवेदन में आरोप लगाया गया है कि घटना की सूचना मिलने पर जब परिजन मौके पर पहुंचे, तब तक पुलिस शव को अस्पताल भेज चुकी थी। परिजनों का कहना है कि शव का निरीक्षण करने पर चेहरे, सीने और दोनों हाथों पर चोटों के निशान मिले, लेकिन शरीर के अन्य हिस्सों पर वैसी गंभीर चोटें नहीं थीं, जैसी किसी बड़े सड़क हादसे में सामान्य रूप से दिखाई देती हैं।

परिजनों ने संबंधित पिकअप वाहन की स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि वाहन में ऐसी कोई गंभीर क्षति दिखाई नहीं दी, जिससे यह लगे कि वाहन पलटा हो या किसी व्यक्ति के नीचे आने से बड़ा हादसा हुआ हो।

इन्हीं परिस्थितियों के आधार पर परिवार ने घटना को संदिग्ध बताते हुए आशंका जताई है कि वास्तविक तथ्यों को छिपाकर मामले को सड़क दुर्घटना का रूप दिया गया हो सकता है।

रामरतन रेगर ने पुलिस अधीक्षक से स्वतंत्र और उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए घटनास्थल के पुनः निरीक्षण, वाहन के तकनीकी परीक्षण, पोस्टमार्टम रिपोर्ट की दोबारा समीक्षा और उस समय ड्यूटी पर मौजूद अधिकारियों से पुनः पूछताछ की मांग की है।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या तथ्य छिपाने की भूमिका सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

परिजनों का कहना है कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है और निष्पक्ष जांच होने पर घटना की वास्तविक सच्चाई सामने आ सकेगी।

फिलहाल अब सबकी नजर पुलिस प्रशासन पर है कि दो साल पुराने इस मामले में पुनः जांच के आदेश दिए जाते हैं या नहीं।

दो साल पुराना मामला… सड़क दुर्घटना पर उठते सवाल… और निष्पक्ष जांच की मांग। अब देखना होगा कि पुलिस प्रशासन इस आवेदन को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या इस मामले की परतें दोबारा खोली जाएंगी।