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अनूपपर/ अनूपपर जिले के स्वास्थ्य विभाग को 15वर्ष से लगी काली छाया ने नित नए भ्रष्टाचार के मामले को लेकर सुर्खियों में बना हुआ है इस जिले में पदस्थ जिम्मेदार अधिकारी केवल नियम विरुद्ध कार्यों में शतक लगाने आते हैं और सरकारी राशि में अपना हाथ और मुँह काला किए जाने के बाद बैरंग वापस हो जाते हैं जिले का यह एक ऐसा विभाग है जहां नियम कानून को भ्रष्टाचार रूपी कलम और राउंड चेयर की कुर्सी के बीच मैनेज कर पूरा मामला खत्म कर दिया जा रहा, मध्यप्रदेश के अंदर अनूपपुर जिला एक पहला ऐसा जिला है जिसकी जांच ईओडब्ल्यू और ईडी में लंबित है फिर भी, इतना सब कुछ देखने के बाद जिले में पदस्थ जिम्मेदार अधिकारी अपना हाथ और मुँह काला करने से बाज नहीं आ रहे।
ज्ञातव्य है कि विगत डेढ़ वर्ष पूर्व जिले के स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी रहे ए.के अवधिया एवं सिविल सर्जन रही उनकी पत्नी जो वर्तमान समय में जेडी कार्यलय रीवा किलमैन सम्हाल रही दोनों मियाँ और बीबी ने मिलकर अनूपपर जिले के जिला चिकित्सालय अनूपपुर के नवीन भवन में बिजली की समस्या से निपटने एवं आवश्यक मशीनरी के संचालन हेतु सौर ऊर्जा का प्रस्ताव तैयार कर कलेक्टर को गुमराह करते हुए लगभग आधे करोड़ रूपए की राशि स्वीकृत कराई गई, जिसमें विभाग के कुछ अन्य कर्मचारियों एवं ठेकेदार के साथ मिलीभगत करते हुए उक्त राशि का बंदरबांट कर लगभग पांच लाख के अंदर की सामग्री को लगभग पचास लाख रुपए में खरीद कर बंदरबांट के लिया ।
इतना सब कुछ होने के बाद भी सबसे मजे की बात तो यह है कि लगभग डेढ़ से दो वर्ष बीतने जा रहे जिला चिकित्सालय के उपरोक्त नवीन भवन में सौर ऊर्जा के नाम पर लाखों रुपए खर्च होकर भ्रष्टाचार में समाहित हो गये लेकिन उस नकली प्लांट की ऊर्जा अभी तक लोगो को देखने को नहीं मिली।
सबसे प्रमुख बात तो यह है कलेक्टर अनूपपर के द्वारा आए दिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, कर्मचारियों की बैठक कर, विभाग की समस्या को दूर किए जाने का नकली प्लान तैयार कर रहे हैं सरकार के लाखों रुपए खर्च होने के बाद भी प्लांट चालू आखिर क्यों नहीं हो रहा कि मानिटरिंग इतने दिन बीत जाने के बाद भी आज तक नहीं कर सके।
फिर भी जिले के सम्माननीय जनों ने मध्यप्रदेश शासन के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव,प्रदेश के। स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला, कमिश्नर सुरभि गुप्ता, कलेक्टर हर्षल पंचोली से मान क्या है कि पूरे मामले की विधिवत जांच कराकर दोशी जन पर दंडात्मक कार्यवाही करते हुए ठेकेदार के ठेका को निलंबित कर दोषियों के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध कराते हुए राशि वसूल किए जाने की कार्यवाही सुनिश्चित करें।