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दक्षिण पन्ना वनमंडल द्वारा वन क्षेत्रों को स्वच्छ एवं प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए वर्ष 2025 के विभिन्न पौधारोपण स्थलों से पौधों के रोपण उपरांत शेष बचे प्लास्टिक पॉलीबैगों का व्यापक संग्रहण अभियान चलाया गया। वनकर्मियों एवं स्थानीय वन समितियों के सहयोग से लगभग 11,260 किलोग्राम प्लास्टिक कचरे का संग्रहण किया गया। इसके बाद इस सामग्री को साफ कर उसमें मिश्रित मिट्टी, पत्थर एवं अन्य अशुद्धियाँ अलग की गईं, ताकि उसका उचित एवं सुरक्षित निस्तारण किया जा सके।
संग्रहित प्लास्टिक कचरे को अमानगंज स्थित जेके सीमेंट संयंत्र को ऊर्जा पुनर्प्राप्ति (Energy Recovery) हेतु बेचा गया। इससे वन समितियों को लगभग ₹56,300 की राशि प्राप्त होगी। सीमेंट संयंत्रों में उपलब्ध उन्नत प्रदूषण नियंत्रण प्रणालियों एवं इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रीसिपिटेटर (ESP) जैसे उपकरणों के कारण इस प्रकार का निस्तारण खुले में जलाने अथवा अवैज्ञानिक तरीके से फेंकने की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित एवं पर्यावरण अनुकूल माना जाता है। वन विभाग के अनुसार पौधारोपण के बाद पॉलीबैगों को वन क्षेत्र में छोड़ देना, गड्ढों में दबा देना अथवा खुले में जला देना पर्यावरण के लिए हानिकारक हो सकता है। समय के साथ यह प्लास्टिक छोटे-छोटे कणों में टूटकर माइक्रोप्लास्टिक का रूप ले लेता है, जो मृदा, जल स्रोतों, वन्यजीवों तथा मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इस पहल से न केवल पौधारोपण स्थलों को प्लास्टिक मुक्त बनाने में सफलता मिली, बल्कि अनुमानतः लगभग 68,000 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) समतुल्य ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को भी रोका जा सका।

इस अभियान का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि अपशिष्ट समझी जाने वाली सामग्री को उपयोगी संसाधन में परिवर्तित किया गया। प्राप्त राशि का उपयोग वन समितियों द्वारा स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण, सामुदायिक विकास तथा अन्य रचनात्मक गतिविधियों में किया जाएगा। यह पहल दर्शाती है कि जनसहभागिता, स्वच्छता और वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों को भी प्रत्यक्ष लाभ पहुँचाया जा सकता है।