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मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सरकारी योजनाओं के दावों पर सवाल खड़े करती है। यहां बल्देवगढ़ ब्लॉक की ग्राम पंचायत बड़ाघाट के तमोरा गांव में करीब 1800 ग्रामीण पिछले तीन महीनों से पेयजल संकट झेल रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि लोग मजबूरी में तालाब का मटमैला पानी पीने को विवश हैं।
यह तस्वीरें टीकमगढ़ जिले के बल्देवगढ़ विकासखंड के तमोरा गांव की हैं। गांव में महिलाएं और बच्चे तालाब से पानी भरकर अपने घर ले जा रहे हैं। जिस तालाब में मवेशी भी उतरते हैं, उसी का पानी ग्रामीण पीने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पानी को तीन से चार बार छानने के बाद ही पीना पड़ता है।
ग्रामीणों के अनुसार, गांव में पिछले तीन महीनों से नल-जल योजना पूरी तरह बंद पड़ी है। बताया जा रहा है कि बिजली बिल का भुगतान नहीं होने के कारण योजना का संचालन रुक गया है।
गौरतलब है कि 25 नवंबर 2021 को 55 लाख 4 हजार रुपये की लागत से तैयार रेट्रोफिटिंग नल-जल योजना का वर्चुअल लोकार्पण किया गया था। इस योजना का उद्देश्य गांव के प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना था। लेकिन वर्तमान में योजना बंद होने के कारण ग्रामीणों को फिर से तालाब और हैंडपंपों पर निर्भर होना पड़ रहा है।
ग्रामीण बताते हैं कि पूरे गांव में केवल दो हैंडपंप हैं। इनमें से एक हैंडपंप पर्याप्त पानी नहीं देता, जिससे पूरे गांव की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है। तालाब से पानी भर रही फूलाबाई का कहना है कि तीन महीने से नलों में पानी नहीं आया है।
वहीं गिल्लन बाई अहिरवार ने बताया कि पानी की टंकी बंद पड़ी है, इसलिए तालाब का पानी ही पीने और मवेशियों को पिलाने के लिए लाना पड़ रहा है। श्याम बाई का कहना है कि प्यासे तो नहीं रह सकते, इसलिए मजबूरी में तालाब का पानी कई बार छानकर पी रहे हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बंद पड़ी नल-जल योजना को जल्द से जल्द दोबारा शुरू कराया जाए, ताकि लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके। फिलहाल इस मामले में संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।