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सोनकच्छ। नगर परिषद अध्यक्ष श्रुति कृष्णपाल सिंह बघेल की पहल पर आज सुबह से पीपलेश्वर घाट स्थित कालीसिंध नदी के गहरीकरण कार्य की शुरुआत हो गई। वर्षों से नदी में गाद जमने के कारण इसकी गहराई और जल ग्रहण क्षमता लगातार कम होती जा रही थी। मानसून पूर्व इस समस्या को देखते हुए गहरीकरण कार्य प्रारंभ किया गया है।

नगर परिषद अध्यक्ष श्रुति कृष्णपाल सिंह बघेल ने बताया कि कालीसिंध नदी के गहरीकरण को लेकर पिछले एक वर्ष से प्रयास किए जा रहे थे। पिछले वर्ष समय से पहले नदी में पानी आने के कारण कार्य नहीं हो सका था, लेकिन इस बार नदी पूरी तरह सूख जाने से गहरीकरण का निर्णय लिया गया।

उन्होंने बताया कि नगर परिषद के पास पर्याप्त फंड उपलब्ध नहीं है और जल संरक्षण अभियानों के लिए अलग से आर्थिक सहायता भी नहीं मिल पाती। इसके बावजूद कालीसिंध नदी को बचाने के उद्देश्य से जनसहयोग के माध्यम से यह कार्य शुरू किया गया है।

नगर परिषद अध्यक्ष ने जनप्रतिनिधियों, नगरवासियों, समाजसेवी संस्थाओं एवं प्रशासनिक अधिकारियों से इस पुनीत कार्य में आर्थिक सहयोग करने की अपील की है। उनका कहना है कि यह केवल नदी गहरीकरण का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के जल भविष्य को सुरक्षित करने का प्रयास है। यदि सभी मिलकर सहयोग करें, तो कालीसिंध नदी को पुनः जीवन दिया जा सकता है।

नगर परिषद अध्यक्ष द्वारा किसान भाइयों से की गई अपील का असर भी देखने को मिला। सुबह से ही क्षेत्र के किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर घाट पर पहुंचने लगे और नदी से निकलने वाली उपजाऊ मिट्टी अपने खेतों के लिए ले जाने लगे। किसानों का कहना है कि कालीसिंध नदी की मिट्टी खेतों के लिए अत्यंत लाभकारी होती है, जिससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है।

गौरतलब है कि हाल ही में प्रकाशित खबर “जल बिन सब सून…!” में कालीसिंध नदी की बदहाल स्थिति, कई फीट तक जमी गाद और घटती जल ग्रहण क्षमता का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था। मानसून आने में अब कम समय शेष है, ऐसे में समय रहते गहरीकरण कार्य शुरू होने से क्षेत्रवासियों में उम्मीद जगी है कि इस बार बारिश का पानी अधिक समय तक नदी में ठहर सकेगा और जल संकट से राहत मिलेगी।