जयपुर/नीमच। आरटीओ प्रथम की उड़नदस्ता टीम ने दिल्ली रोड स्थित खोले के हनुमान जी क्षेत्र की गोविंद वाटिका में संचालित एक अवैध बस बॉडी निर्माण इकाई पर कार्रवाई करते हुए परिवहन नियमों के उल्लंघन का बड़ा मामला उजागर किया है। जांच के दौरान दो बसें निर्माणाधीन अवस्था में मिलीं, जबकि कई अन्य बसें भी बॉडी निर्माण के लिए परिसर में खड़ी थीं।
आरटीओ प्रथम राजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि विभाग को सूचना मिली थी कि कुछ बसों का चेसिस स्तर पर पंजीयन करवाने के बाद जयपुर में अवैध रूप से बॉडी निर्माण कराया जा रहा है। सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई में बस क्रमांक MP 44 ZG 9665 और MP 44 ZG 9465 निर्माणाधीन अवस्था में पाई गईं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि दोनों बसों का पंजीयन लगभग 15 दिन पूर्व मध्यप्रदेश के नीमच आरटीओ में कराया गया था, जबकि बसों की बॉडी का निर्माण अभी पूरा भी नहीं हुआ था। अधिकारियों के अनुसार यह भी जांच का विषय है कि जिन वाहनों का पंजीयन किया गया, वे भौतिक रूप से संबंधित आरटीओ कार्यालय तक पहुंचे भी थे या नहीं।
बिना ट्रेड सर्टिफिकेट चल रहा था निर्माण कार्य
जांच में पता चला कि मुबीर पुत्र यासिन के परिसर में बस बॉडी निर्माण का कार्य किया जा रहा था। विभागीय अधिकारियों को मौके पर वैध ट्रेड सर्टिफिकेट, बस बॉडी कोड से संबंधित दस्तावेज और आवश्यक स्वीकृतियां उपलब्ध नहीं मिलीं। इसके बाद निर्माण इकाई के संचालन को लेकर भी जांच शुरू कर दी गई है।
36 स्लीपर और वॉशरूम वाली बसें थीं तैयार
निरीक्षण के दौरान दोनों बसों में 36 स्लीपर सीटों और वॉशरूम की व्यवस्था की जा रही थी। ट्रांसपोर्ट इंस्पेक्टर महेश पारीक ने बताया कि दोनों वाहनों का चेसिस स्तर पर पंजीयन किया गया था और मौके पर उनकी बॉडी तैयार की जा रही थी। सुरक्षा मानकों और निर्माण सामग्री की भी जांच की जा रही है।
एक-दो दिन में सड़क पर उतर सकती थीं बसें
मौके पर जांच के दौरान पाया गया कि दोनों बसों की बॉडी लगभग तैयार हो चुकी थी और अंतिम फिटिंग का कार्य चल रहा था। विभागीय कार्रवाई नहीं होती तो संभवतः एक-दो दिन में ये बसें संचालन के लिए तैयार हो जातीं।
पंजीयन निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू
डीटीओ नाथू सिंह ने बताया कि मामले में वाहन स्वामियों, बस बॉडी बिल्डर तथा पंजीयन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। संबंधित पक्षों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने और दोनों वाहनों का पंजीयन निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
परिवहन विभाग की निगरानी पर उठे सवाल
कार्रवाई के बाद यह सवाल भी खड़ा हो गया है कि जयपुर-दिल्ली हाईवे से मात्र 10 मीटर दूरी पर संचालित इस इकाई में लंबे समय से बस निर्माण का कार्य चल रहा था, फिर भी इसकी जानकारी विभाग को समय पर क्यों नहीं मिल सकी। अब अवैध बस निर्माण और संदिग्ध पंजीयन के पूरे नेटवर्क की जांच परिवहन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।












Leave a Reply