खरगोन निमाड़ अंचल की मिट्टी में लोक परंपराएं आज भी जीवंत हैं। इन्हीं प्राचीन परंपराओं में से एक है ‘डोडगली अमावस्या’, जिसे कई क्षेत्रों में ‘डेडगली अमावस्या’ के नाम से भी जाना जाता है। ज्येष्ठ मास में आने वाली यह अनूठी लोक परंपरा मुख्य रूप से अच्छी वर्षा और मानसून के आगमन की कामना से जुड़ी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह पर्व बच्चों, बुजुर्गों और पूरे समाज को एक सूत्र में बांधने का कार्य करता है।
इस परंपरा के तहत गांव के बच्चे और किशोर समूह बनाकर निकलते हैं। इनमें एक बच्चे को पलाश (टेसू) की पत्तियों और डालियों से सजाकर ‘मेंढक’ का रूप दिया जाता है। निमाड़ी बोली में मेंढक को ‘डेडर’ कहा जाता है, इसी कारण इस परंपरा का नाम ‘डोडगली’ या ‘डेडगली’ पड़ा।
निमाड़ की लोक परंपरा ‘डोडगली अमावस्या’ : अच्छी बारिश और लोक संस्कृति का अनूठा पर्व
