दक्षिण पन्ना में जल संरक्षण का अनोखा मॉडल, जंगलों में फिर बहने लगा जीवन

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अनूप कुमार शुक्ला

पन्ना दक्षिण पन्ना वनमण्डल में जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह में विभिन्न वन परिक्षेत्रों में प्राकृतिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन, मरम्मत एवं संरक्षण हेतु व्यापक स्तर पर कार्य किए गए। इन प्रयासों का उद्देश्य ग्रीष्म ऋतु में वन्यजीवों, पक्षियों एवं अन्य छोटे जीवों के लिए सुरक्षित एवं पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है।

वन परिक्षेत्र शाहनगर में रामपुर बीट स्थित महिपाल कुंड झिरिया में झिरिया पुनर्जीवन कार्य कार्यवाहक वनपाल एवं परिक्षेत्र सहायक बिसानी अनिल प्रताप सिंह, वनरक्षक संतोष रजक एवं रचना जादौन द्वारा कराया गया। बिसानी बीट में वनरक्षक रचना जादौन द्वारा झिरिया की सफाई कर जल स्रोत को पुनर्जीवित किया गया। वहीं उमरिया बीट स्थित मेड़े की झिरिया एवं सिद्ध बाबा झिरिया में वनरक्षक आशीष कुमार पांडे द्वारा मलवा हटाने, झाड़ियों की सफाई, पत्थर लगाने एवं खुदाई कार्य कर प्राकृतिक जल रिसाव को पुनर्जीवित किया गया, जिसके बाद झिरिया में जल भराव देखा गया।

शाहनगर रेंज में ही हरदुआ बीट में राहुल जैन एवं टिकरिया सर्किल के परिक्षेत्र सहायक बराती लाल गोंड द्वारा झिरिया सफाई कार्य कराया गया। बोरी बीट में वनरक्षक प्रेम नारायण वर्मा द्वारा झिरिया सफाई, सौसर निर्माण, मिट्टी के सकोरे एवं पुराने टायरों को संशोधित कर उनमें पानी भरवाकर वन्यजीवों एवं पक्षियों के लिए अभिनव जल व्यवस्था विकसित की गई। वहीं बौराई झिरिया में वनरक्षक ओमप्रकाश द्विवेदी द्वारा जल स्रोत सुधार कार्य किया गया। रेंज में पक्षियों के लिए पेड़ों पर सकोरे रखवाकर भी जल उपलब्धता सुनिश्चित की गई।

मोहन्द्रा रेंज में गोरहा बीट में वनरक्षक हरिशंकर अहिरवार द्वारा झिरिया सफाई कार्य कराया गया। मडवा नाका एवं बम्हौरी में वनरक्षक गौरव दीक्षित द्वारा पक्षियों हेतु सकोरे रखवाने एवं झिरिया मरम्मत का कार्य किया गया। मोतीडोल सर्किल के परिक्षेत्र सहायक भानू प्रताप सिंह, वनरक्षक अजय प्रताप सिंह एवं प्रकाश प्रजापति द्वारा फतेहपुर एवं लाखनचोरी बीटों में पक्षियों के लिए जल व्यवस्था की गई।

मोतीडोल बीट में वनरक्षक अरविंद कुमार विश्वकर्मा द्वारा कुंडा झिरिया की सफाई कर मधुमक्खियों एवं छोटे जीवों हेतु भी जल स्रोत विकसित किया गया, साथ ही वनरक्षक आवास परिसर में पक्षियों के लिए सकोरों की व्यवस्था की गई। पूर्वी मोहन्द्रा बीट में वनरक्षक जय प्रकाश नारायण दुबे द्वारा नाका क्षेत्र में पक्षियों के लिए पेयजल व्यवस्था की गई, जबकि अम्हां बीट में वनरक्षक संगीता अहिरवार द्वारा इमली झिरिया की सफाई एवं पक्षियों हेतु जल व्यवस्था कराई गई। पश्चिमी मोहन्द्रा में वनरक्षक जगदीश प्रसाद अहिरवार द्वारा झिरिया सफाई कार्य कराया गया।

कल्दा रेंज में वनरक्षक संदीप बघेल द्वारा मेहगवां बीट में जल स्रोत सुधार कार्य किए गए। वहीं कुटरहिया बीट में वनरक्षक सूर्य प्रताप बघेल द्वारा सौसर में जल भराव, झिरिया सफाई एवं जल संरचनाओं की मरम्मत एवं पुनर्भरण का कार्य कराया गया, जिससे वन्यजीवों को निरंतर जल उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।

वन परिक्षेत्र रैपुरा में भरतला बीट में वनरक्षक रजनीश चौरसिया द्वारा प्राकृतिक झिरियाओं की सफाई की गई। वनरक्षक बद्री प्रसाद यादव द्वारा विभिन्न जल स्रोतों जैसे गल गल झिरिया, कुड़िया झिरिया, अलौनी जल स्रोत एवं घुटेही क्षेत्र के जल स्रोतों की सफाई एवं सुधार कार्य किए गए। बड़ागांव बीट स्थित मुठहा बाबा झिरिया में वनरक्षक अरविंद सिंह द्वारा मरम्मत एवं जल व्यवस्था कार्य कराया गया, साथ ही वन्यप्राणियों हेतु सौसर में पानी भरवाया गया। अधराड़ घाट झिरिया में वनरक्षक सुमंत सिंह द्वारा सफाई कार्य किया गया तथा चमरैया बीट स्थित मोसाई झिरिया में वनरक्षक धीरेन्द्र सिंह द्वारा झिरिया सफाई कराई गई।

सलेहा रेंज में वनरक्षक महेंद्र अग्रहरि द्वारा झिरिया मरम्मत कार्य किया गया। खिलसारी बीट में दुधरियन नाला, पटिहट नाला एवं चकदही नाला की झिरियाओं में वनरक्षक सूर्य प्रताप सिंह द्वारा सुरक्षा श्रमिकों के सहयोग से मरम्मत एवं सफाई कार्य कराया गया। वहीं हरदुआ बीट में वनरक्षक उमाशंकर पाल द्वारा चार झिरियाओं का सुधार एवं मरम्मत कार्य कराया गया, जहां वर्तमान में स्वच्छ एवं पेयजल उपलब्ध है।

पवई रेंज में नारदपुर बीट में वनरक्षक पुष्पेंद्र अहिरवार द्वारा झिरिया सफाई कार्य कराया गया। कैमूरिया बीट में वनरक्षक विनय सिंह द्वारा झिरिया मरम्मत, सुधार एवं सफाई कार्य संपन्न किया गया। इन सतत प्रयासों के माध्यम से दक्षिण पन्ना वनमण्डल में प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण करते हुए वन्यजीवों, पक्षियों एवं अन्य जीवों के लिए सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं।

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