एक शिक्षक अपने ज्ञान, संस्कार मार्गदर्शन से विद्यार्थियों के जीवन को दिशा देने का कार्य करता है।” डॉ.गीरी गोस्वामी

तराना :- ग्राम भारती शिक्षा समिति जिला उज्जैन द्वारा सरस्वती शिशु मंदिर तराना में सप्त दिवसीय नवीन आचार्य शिक्षण वर्ग का शुभारंभ आज अत्यंत गरिमामय एवं प्रेरणादायी वातावरण में उद्घाटन हुआ। सर्वप्रथम अतिथियों ने माँ सरस्वती कि प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर वर्ग ध्वज का अतिथियों द्वारा ध्वजारोहण किया गया । संपूर्ण वातावरण भारतीय संस्कृति, शिक्षा एवं संस्कारों की भावना से ओत-प्रोत दिखाई दिया।


वर्ग प्रशिक्षण कार्यशाला में मुख्य वक्ता डॉ. डाली गिरी गोस्वामी विद्या भारती ग्रामीण शिक्षा मालवा प्रांत सहसचिव,वर्ग संयोजक राजेंद्रसिह राजावत ,शिवनारायण कोदीवाल विद्यालय व्यवस्था प्रमुख, जिला प्रमुख राजपालसिंह पंवार ,वर्ग महाप्रबंधक दिनेश देवड़ा संकुल प्रमुख रूपाखेड़ी के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में वर्ग का शुभारंभ हुआ।अतिथि परिचय तहसील प्रमुख अर्जुन पाटीदार ने करवाया


अतिथियों का स्वागत मीना कोठारी , रतनलाल प्रजापत , कुलदिप चौरसिया ने किया। नवीन आचार्य वर्ग का उद्देश्य नवीन आचार्यों को शिक्षा के आधुनिक स्वरूप, शिक्षण कौशल एवं भारतीय संस्कृति आधारित शिक्षण पद्धति से परिचित कराना रहा।
प्रशिक्षण सत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। इसमें शिक्षा के उद्देश्य, नई शैक्षणिक संरचना 5+3+3+4, भारत केन्द्रित शिक्षा, मातृभाषा में शिक्षण, कौशल विकास, व्यावसायिक शिक्षा, डिजिटल शिक्षा एवं नीति के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे विषयों को विशेष रूप से शामिल किया गया। वक्ताओं ने बताया कि नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों के केवल शैक्षणिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके व्यक्तित्व, संस्कार, सृजनात्मकता एवं आत्मनिर्भरता के विकास पर भी विशेष बल देती है।


नविन आचार्य प्रशिक्षण वर्ग कार्यशाला के प्रथम सत्र में डॉ.श्रीमती डाली गिरी गोस्वामी का वक्तव्य विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रहा। आपने अपने प्रभावशाली उद्बोधन में कहा कि —
“शिक्षक केवल पाठ पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का शिल्पकार होता है। एक शिक्षक अपने ज्ञान, संस्कार एवं मार्गदर्शन से विद्यार्थियों के जीवन को दिशा देने का कार्य करता है।” डॉ. गोस्वामी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक एवं दूरगामी परिवर्तन लाने वाली नीति है। यह नीति विद्यार्थियों को केवल परीक्षा केंद्रित शिक्षा नहीं देती, बल्कि उन्हें व्यवहारिक ज्ञान, नैतिक मूल्यों एवं जीवनोपयोगी कौशलों से भी जोड़ती है। आपने मातृभाषा आधारित शिक्षण, कौशल विकास एवं भारतीय संस्कृति के संरक्षण को नई शिक्षा नीति की सबसे बड़ी विशेषताओं में बताया।
अपने संबोधन में आपने यह भी कहा कि आज के समय में शिक्षक की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। शिक्षक यदि समर्पण, अनुशासन एवं सकारात्मक सोच के साथ कार्य करे, तो विद्यार्थी भविष्य में आदर्श नागरिक बनकर समाज एवं राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। आपने नवीन आचार्यों से विद्यार्थियों में संस्कार, अनुशासन एवं आत्मविश्वास विकसित करने का आह्वान किया।


डॉ. डाली गिरी गोस्वामी के प्रेरणादायी विचारों ने उपस्थित नवीन आचार्यों में नई ऊर्जा एवं उत्साह का संचार किया। कार्यक्रम में उपस्थित आचार्यों ने नई शिक्षा नीति के विभिन्न आयामों को समझते हुए उन्हें व्यवहारिक रूप से शिक्षा में लागू करने का संकल्प लिया।प्रथम सत्र कि कार्यशाला का समापन राष्ट्र निर्माण, संस्कारयुक्त शिक्षा एवं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के संकल्प के साथ हुआ। शिक्षण सत्र में पंचपदी का परिचय मोहित पंवार प्राचार्य तराना और आईसीटी में सर्वे हॉट, गूगल फॉर्म पर कार्य अशोक पाटीदार शिक्षण प्रभारी द्वारा लिया गया। अभिभावक सम्पर्क क्यों और कैसे विषय पर गट सह दिनेश देवड़ा संकुल प्रमुख रूपाखेड़ी, सुमेंरसिंह चौहान संकुल प्रमुख निपानिया राजू द्वारा लिया गया। उद्घाटन समारोह का सफल संचालन अशोक पाटीदार संकुल प्रमुख सेदरी ने किया जानकारी प्रशिक्षण वर्ग प्रचार प्रसार प्रमुख शिवनारायण गुर्जर प्रधानाचार्य ने दी

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