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अनूपपुर 30 अप्रैल 2026/ एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय अनूपपुर में सत्र 2026-27 में कक्षा 11 वीं में लेटरल एंट्री (रिक्त सीट) के माध्यम से प्रवेश हेतु आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। आवेदन ऑफलाईन मोड में एकलव्य विद्यालय में भरे जाएंगे। जिसके माध्यम से विभिन्न संकायों (विज्ञान, कला एवं कामर्स) में कक्षा 10 वीं में प्राप्त अंकों के आधार पर बनाई गई मेरिट सूची के आधार पर संकायों का आवंटन किया जाएगा।

जनगणना 2027 में मकान सूचीकरण, मकानों की गणना कार्य के लिए कंट्रोल रूम स्थापित

एकलव्य विद्यालय के प्राचार्य ने बताया है कि आवेदन करने के लिए विद्यार्थियों को 10 वीं कक्षा की अंकसूची, आधार कार्ड, प्रोफाईल पंजीयन, समग्र आईडी, डिजिटल जाति प्रमाण पत्र, बैंक पास बुक की छायाप्रतियों सहित 3 पासपोर्ट साईज फोटो लाना अनिवार्य होगा। आवेदन करने की अंतिम तिथि 07 मई 2026 है। अधिक जानकारी हेतु मोबाईल नम्बर 9663971802, 9993184183, 6261408628 पर सम्पर्क किया जा सकता है।

अनूपपुर //वेद शर्मा //-30 अप्रैल 2026/ भारत सरकार के आगामी जनगणना 2027 कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन हेतु अनूपपुर जिले में प्रशासनिक तैयारियाँ तेज हो गई हैं। जनगणना के प्रथम चरण, जिसमें मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य शामिल है, 1 मई से 31 मई 2026 तक संचालित किया जाएगा। जिसके अनुसार जिला स्तरीय कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है।

चार्ज स्तर से मकान सूचीकरण एवं मकान की गणना की प्रतिदिवस रिपोर्ट प्राप्त करने हेतु प्रभारी नायब तहसीलदार श्री गुरुदास महरा को नोडल अधिकारी तथा एपीसी श्री संतोष कुमार तिवारी को सहायक नोडल अधिकारी बनाया गया है। इनके सहयोग हेतु शासकीय एवं आउटसोर्स कर्मचारियों की ड्यूटी जनगणना कन्ट्रोल रूम (जनगणना शाखा कलेक्ट्रेट कार्यालय अनूपपुर) में लगाया गया है।

तहसील अनूपपुर, नगरपालिका अनूपपुर, पसान, नगर परिषद बरगवां (अमलाई) हेतु पटवारी श्री नीलेश कछवाहा, तहसील जैतहरी, नगर परिषद जैतहरी के लिए पटवारी श्री राजेश कुर्मी, तहसील पुष्पराजगढ़, नगर परिषद अमरकंटक के लिए कलेक्ट्रेट कार्यालय के कम्प्यूटर ऑपरेटर श्री बाबूराम सिंह राठौर तथा तहसील कोतमा, नगरपालिका कोतमा, बिजुरी, नगर परिषद डोला, डूमरकछार, बनगवॉ (राजनगर) के लिए कलेक्ट्रेट कार्यालय के आउटसोर्स कम्प्यूटर ऑपरेटर श्री दीपक रौतेल की ड्यूटी लगाई गई है।

नरवाई को जलाएं नहीं, कृषि यंत्रों और तकनीक का उपयोग कर उसे काम में लें

अनूपपुर 30 अप्रैल 2026/ कृषि विभाग द्वारा किसानों को सलाह दी गई है कि रबी फसल की कटाई के बाद नरवाई में आग न लगाएं, बल्कि फसल अवशेष प्रबंधन के लिए उन्नत कृषि यंत्र एवं तकनीक का उपयोग करें। बेलर मशीन का उपयोग फसल अवशेषों को एकत्र करने में होता है। इससे पशु आहार और ईंधन के रूप में उपयोग में लाना आसान हो जाता है। यह मशीन फसल अवशेष को एकत्र कर, दबाकर एवं रस्सी से बांधकर गठे के रूप में मशीन के पीछे एक लाइन में गिराती चली जाती है। स्ट्रा रीपर एक ऐसी फसल अवशेष प्रबंधन मशीन है, जो एक ही वार में फसल अवशेष को काटती है, थ्रेस व साफ करती है। यह मशीन फसल अवशेषों से पशु चारा बनाने के लिए उपयुक्त है।

इस मशीन को चलाने के लिए 35 एच.पी. शक्ति के ट्रैक्टर की आवश्यकता होती है। ट्रैक्टर पी.टी.ओ. द्वारा चालित मशीनें पहली- मल्चर, जो फसल अवशेषों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटती है। इन अवशेष को डिस्क हैरो मशीन से आसानी से मिट्टी में मिला सकते हैं। दूसरी- हैप्पी सीडर, जिसमें आगे की तरफ फसल अवशेष काटने के लिए ब्लेड और पीछे बुवाई की प्रणाली जुड़ी होती है। तीसरी- रोटरी डिस्क ड्रिल, जिसमें आगे के तरफ सॉयल रेजर डिस्क और पीछे की तरफ बुवाई प्रणाली जुड़ी होती है। चौथी- रोटावेटर, जो खेत तैयार करने का एक मुख्य उपकरण है। इसमें एल या सी आकार के ब्लेड लगे होते हैं। अन्य मशीनें स्ट्रिप टिल ड्रिल एक प्रकार की सक्रिय पीटीओ चलित बुवाई मशीन है, जिसमें आगे जे प्रकार के ब्लेड और पीछे बीज बुवाई प्रणाली जुड़ी होती है। रोटरी टिल ड्रिल एक पीटीओ चलित बुवाई मशीन है, जिसमें आगे रोटावेटर और पीछे बुवाई प्रणाली जुड़ी रहती है। इससे खेत की तैयारी और बुवाई दोनों कार्य एक साथ किए जाते हैं।

संयुक्त डिस्क हैरो एक संयुक्त भू-परिष्करण उपकरण है जिसमें आगे की डिस्क पी.टी.ओ. द्वारा चलित और पीछे की डिस्क स्वतंत्र रूप से घूमती है। एमबी प्लाऊ मृदा की प्राथमिक जुताई के लिए एक मुख्य तंत्र है, यह फसल अवशेष व ऊपरी सतह में स्थित खरपतवारों के बीजों को अधिक गहराई में दबाने में सक्षम है। जीरो टिल ड्रिल ट्रैक्टर से खींची जाने वाली बुवाई मशीन है, जिससे उल्टे टी आकार के फरो ओपनर्स लगे होते हैं। बिना जुताई किए फसल की सीधी बुवाई करने में सक्षम है। बेलर मशीन 1 घंटे में 1.5 हैक्टेयर खेत में फसल अवशेषों की बंधाई कर देती है। डीजल की खपत लगभग 4 लीटर प्रति घंटा होती है। नरवाई को जलाने के बजाय पशु आहार और ईंधन के रूप में काम में लें। इससे बचत होगी, पर्यावरण को नुकसान का खतरा कम होगा। विभिन्न कृषि यंत्रों पर अनुदान मिलता है, जिसके लिए किसान कृषि विभाग में सम्पर्क कर सकते हैं।

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