दक्षिण पन्ना वनमंडल की सलेहा रेंज ने वर्ष 2026 के अग्नि मौसम में वन अग्नि की रोकथाम एवं नियंत्रण के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। मार्च से मई अवधि के दौरान प्राप्त वन अग्नि अलर्टों की संख्या विगत पाँच वर्षों के औसत लगभग 100 अलर्ट की तुलना में घटकर लगभग 40 रह गई, जो लगभग 60 प्रतिशत की कमी को दर्शाती है। यह उपलब्धि वन विभाग, संयुक्त वन प्रबंधन समितियों, ग्रामीणों तथा फायर वॉचरों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है।
अग्नि मौसम प्रारंभ होने से पूर्व सलेहा रेंज द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में फायर लाइन निर्माण एवं रखरखाव का कार्य प्राथमिकता से किया गया। वनमंडल कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराए गए ध्वनि विस्तारक यंत्रों (स्पीकर) के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया गया। संयुक्त वन प्रबंधन समितियों की नियमित बैठकों के माध्यम से ग्रामीणों को वन अग्नि के दुष्परिणामों तथा रोकथाम के उपायों से अवगत कराया गया। विशेष रूप से महुआ संग्राहकों को महुआ संग्रहण के दौरान सूखी पत्तियों या वृक्षों के आसपास आग न लगाने के लिए प्रेरित किया गया तथा उनकी निगरानी भी सुनिश्चित की गई।
यह भी स्पष्ट किया गया कि जानबूझकर वन अग्नि लगाने की स्थिति में भारतीय वन अधिनियम, 1927 के प्रावधानों के अंतर्गत विधिक कार्रवाई की जाएगी। गोवर्धा वॉच टॉवर के माध्यम से अग्नि संभावित क्षेत्रों की सतत निगरानी की गई तथा त्वरित प्रतिक्रिया दल (Quick Response Team) को सक्रिय रखा गया। ग्रामीणों, समिति सदस्यों एवं फायर वॉचरों द्वारा समय पर सूचना उपलब्ध कराने से कई स्थानों पर आग को प्रारंभिक अवस्था में ही नियंत्रित किया जा सका। साथ ही, फायर बीटर, रेक एवं अन्य अग्निशमन उपकरणों का प्रभावी उपयोग नियंत्रण कार्यों में अत्यंत सहायक सिद्ध हुआ।
वनमंडल द्वारा फायर वॉचरों को टी-शर्ट एवं पानी की बोतलें उपलब्ध कराकर उनका उत्साहवर्धन किया गया। समिति सदस्यों, ग्रामीणों, फायर वॉचरों एवं वन अमले के बीच बेहतर समन्वय ने वन अग्नि नियंत्रण को जनभागीदारी आधारित अभियान का स्वरूप प्रदान किया। सलेहा रेंज की यह सफलता दर्शाती है कि योजनाबद्ध तैयारी, सतत निगरानी और स्थानीय समुदाय की सक्रिय सहभागिता से वन अग्नि जैसी गंभीर चुनौती पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है।












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