कहते हैं प्यार की कोई जुबान नहीं होती, और शाजापुर के मोरटाकेवड़ी में यह बात हकीकत बनकर सामने आई। हिमालेश्वर धाम में आयोजित एक अनोखी शादी आज पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां शेरसिंह और मुस्कान ने बिना शब्दों के, सिर्फ इशारों और एहसासों के सहारे सात फेरे लेकर जीवनभर साथ निभाने का वचन दिया।
दोनों मूक-बधिर हैं। उनकी दुनिया में आवाजों का शोर नहीं, लेकिन दिलों में एक-दूसरे के लिए अथाह प्रेम और सम्मान है। शादी के दौरान जब पंडित अशोक दीक्षित ने वैदिक मंत्रों के बीच अग्नि के फेरों की रस्म पूरी करवाई, तब शेरसिंह और मुस्कान ने नजरों और हाथों के संकेतों से अपने रिश्ते को नया नाम दिया।
मंत्रों की गूंज, अक्षत की बारिश और परिवारजनों के आशीर्वाद के बीच यह शादी हर किसी को भावुक कर गई। रिश्तेदारों की आंखों में खुशी के आंसू थे और चेहरों पर सुकून साफ नजर आ रहा था। मुस्कान की शर्माती नजरें और शेरसिंह का आत्मविश्वास इस बात का संदेश दे रहे थे कि इंसान अपनी कमी को भी अपनी सबसे बड़ी ताकत बना सकता है।
वरमाला से लेकर सात फेरों तक हर रस्म बेहद खास रही। इस ‘खामोश शादी’ ने समाज को एक बड़ा संदेश दिया है—जिंदगी जीने के लिए आवाज की नहीं, बल्कि सही हमसफर और सच्चे साथ की जरूरत होती है।
मोरटाकेवड़ी के हिमालेश्वर धाम से निकली यह प्रेरणादायक कहानी अब हर किसी के दिल को छू रही है। शेरसिंह और मुस्कान ने साबित कर दिया कि सच्चा प्यार शब्दों से नहीं, बल्कि एहसासों से जिया जाता है।
