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लोकेशन -राजगढ़
संवाददाता -रामबाबू चौहान
राजगढ़ जिले के छापीहेड़ा नगर में सोमवार का दिन गर्व, सम्मान और देशभक्ति की भावना से सराबोर रहा, भारतीय सेना के अग्निवीर हेमंत कुशवाह छह माह का सैन्य प्रशिक्षण पूरा करने के बाद पहली बार अपने नगर लौटा,अपने वीर सपूत के स्वागत के लिए पूरा मोहल्ला और नागरिक उमड़ पड़े, खिलचीपुर चौराहे से डीजे, ढोल-नगाड़ों, तिरंगों और ‘भारत माता की जय’ के नारों के बीच नागरिकों ने फूल बरसाकर हेमंत कुशवाह का जोरदार स्वागत किया. पूरा नगर देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया.
नगर पहुंचने के बाद सबसे पहले रामपुरिया बालाजी मंदिर और भोलेनाथ मंदिर पर दर्शन कर उन्होंने देश और समाज की खुशहाली की प्रार्थना की. इसके बाद उन्होंने सेना की परंपरा निभाते हुए ,अपने माता-पिता, भाई-बहनों और परिवार के अन्य सदस्यों को सैल्यूट कर सम्मान दिया. यह भावुक दृश्य देखकर कई लोगों की आंखें नम हो गईं. उपस्थित लोगों ने तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ाया.
छापीहेड़ा नगर की पहचान केवल खेतीबाड़ी, व्यवसाय ,मजदूरी के लिए ही नहीं, बल्कि देशभक्ति और सैन्य परंपरा के लिए भी है. नगर के कई युवा भारतीय सेना में सेवाएं दे रहे हैं और देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं. ऐसे माहौल में पले-बढ़े युवा बचपन से ही देश सेवा का सपना देखते हैं. हेमंत कुशवाह की उपलब्धि ने इस परंपरा को और मजबूत किया है तथा नगर के बच्चों और युवाओं में नया उत्साह पैदा किया है.
हेमंत कुशवाह ने कठिन मेहनत, अनुशासन और समर्पण के बल पर भारतीय सेना में स्थान बनाया है. छह माह का कठिन सैन्य प्रशिक्षण पूरा कर नगर लौटना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है. उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है. नगर के कई युवाओं ने भी उनसे प्रेरणा लेकर सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने का संकल्प लिया.
देशभक्ति के नारों, तिरंगों और उत्साह से भरे इस स्वागत समारोह में बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं, युवा और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे. पूरे नगर ने अपने वीर सपूत का स्वागत किसी त्योहार की तरह किया. हेमंत कुशवाहा का सम्मान केवल एक सैनिक का सम्मान नहीं था, बल्कि उन सभी युवाओं के हौसले का सम्मान था जो देश सेवा का सपना देखते हैं. उनका संघर्ष, अनुशासन और समर्पण आज पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है.