रिपोर्टर: अजय नवरंग
कायथा। क्षेत्र में इन दिनों अवैध लकड़ी कटाई का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। जंगलों में दिन-रात पेड़ों की कटाई किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं, लेकिन जिम्मेदार वन विभाग और संबंधित अधिकारियों की ओर से अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि लकड़ी माफिया बेखौफ होकर हरे-भरे पेड़ों की कटाई कर रहे हैं। कटे हुए लकड़ी के लट्ठों को पिकअप वाहनों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से क्षेत्र से बाहर ले जाया जा रहा है। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर रोकथाम के ठोस प्रयास दिखाई नहीं दे रहे हैं।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि लगातार हो रही इस गतिविधि से वन संपदा को भारी नुकसान पहुंच रहा है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि संबंधित विभागों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों का इस गंभीर मुद्दे पर क्या रुख है। जंगलों के लगातार हो रहे दोहन के बावजूद जनप्रतिनिधियों की चुप्पी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, यदि समय रहते अवैध कटाई पर रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में क्षेत्र को गंभीर पर्यावरणीय दुष्परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। वन क्षेत्र में कमी आने से जैव विविधता, भूजल स्तर और पर्यावरण संतुलन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस मामले में कब सक्रिय होते हैं और अवैध लकड़ी कटाई पर अंकुश लगाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।












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