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वेद शर्मा
अनूपपुर । पावन श्रावण मास के प्रथम दिवस से ही विश्व प्रसिद्ध तीर्थ एवं तपोभूमि अमरकंटक “बोल बम” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा है। नर्मदा उद्गम की इस दिव्य नगरी में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अनुपम संगम दिखाई दे रहा है। दूर-दराज से आने वाले कांवड़ियों की पदयात्रा ने अमरकंटक की पवित्र वादियों को भक्तिमय बना दिया है। हर ओर केसरिया वस्त्रधारी शिवभक्तों की टोलियां “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के उद्घोष के साथ नर्मदा तट की ओर बढ़ती नजर आ रही हैं।
विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले से आने वाले बोल बम कांवड़िये अमरकंटक पहुंचकर मां नर्मदा का पवित्र जल अपने कलशों में भरते हैं और उसे लेकर लगभग 200 किलोमीटर दूर स्थित प्रसिद्ध भोरमदेव महादेव मंदिर तक पैदल यात्रा करते हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि आस्था में ऐसी अद्भुत शक्ति होती है जो कठिन से कठिन मार्ग को भी सरल बना देती है। यही कारण है कि अनेक कांवड़िये लगातार लगभग एक सप्ताह तक पैदल चलकर भोरमदेव महादेव के चरणों तक पहुंचते हैं और नर्मदा जल से अभिषेक करते हैं।
अमरकंटक पहुंचने पर कांवड़िये सर्वप्रथम मां नर्मदा उद्गम मंदिर में विधिवत पूजन-अर्चन करते हैं। इसके पश्चात वे नर्मदा दर्शन कर अपनी यात्रा की सफलता और परिवार की मंगलकामना का संकल्प लेते हैं। श्रद्धालु यहां स्थित प्राचीन एवं पूजनीय शिवालयों — ज्वालेश्वर महादेव तथा अमरेश्वर महादेव — के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिरों में गूंजते वैदिक मंत्र, घंटियों की मधुर ध्वनि और शिवभक्तों के जयघोष वातावरण को अलौकिक बना रहे हैं।
श्रावण मास प्रारंभ होते ही अमरकंटक के बाजारों, धर्मशालाओं और मंदिर प्रांगणों में भी विशेष चहल-पहल बढ़ गई है। स्थानीय नागरिक कांवड़ियों की सेवा में जल, फल और विश्राम की व्यवस्था कर पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं। जगह-जगह श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए सेवा शिविर लगाए जा रहे हैं, जहां उन्हें पेयजल, प्रसाद और प्राथमिक चिकित्सा की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
धार्मिक मान्यता है कि अमरकंटक से नर्मदा जल लेकर भगवान शिव का अभिषेक करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। इसी विश्वास के साथ हजारों शिवभक्त अमरकंटक की पावन धरती पर पहुंच रहे हैं। श्रावण के प्रथम दिन से प्रारंभ हुई यह आस्था यात्रा आगामी दिनों में और अधिक व्यापक रूप लेने की संभावना है।
अमरकंटक की पवित्र वादियां इन दिनों सचमुच शिवमय हो उठी हैं। श्रद्धा की यह अखंड धारा यह संदेश दे रही है कि सनातन आस्था की शक्ति आज भी जन-जन के हृदय में उतनी ही प्रखर है, जितनी प्राचीन काल में थी। मां नर्मदा की गोद से उठी यह भक्तिधारा भोरमदेव महादेव तक पहुंचकर शिवभक्ति की अनवरत परंपरा को नई ऊर्जा प्रदान कर रही है।