पवई स्थित आचार्य श्री विद्यासागर गौशाला इन दिनों गौ सेवा और संवर्धन के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रही है। सामाजिक सहयोग तथा जैन समाज के तन-मन-धन से किए जा रहे प्रयासों के बीच गौशाला को बदनाम करने की साजिश का आरोप समिति पदाधिकारियों ने लगाया है। समिति का कहना है कि गौशाला की व्यवस्थाओं को लेकर भ्रामक प्रचार करने के बजाय वास्तविक स्थिति का प्रशासनिक स्तर पर भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए।

गौशाला समिति के अनुसार यहां वर्तमान में करीब 6 से 7 हजार गोवंश मौजूद हैं, जबकि सरकारी अभिलेखों में गोवंश की संख्या लगभग 5 हजार दर्ज है। समिति अध्यक्ष रानू जैन ने कहा कि गौशाला में गोवंश के संरक्षण, चारे, पानी, उपचार और देखरेख की व्यवस्थाओं को लगातार बेहतर बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गौशाला को अब तक चार बार मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित किया जा चुका है, जो यहां किए जा रहे गौ सेवा के कार्यों का प्रमाण है।

जैन समाज पूर्ण समर्पण के साथ कर रहा गौ सेवा

पवई का जैन समाज गौ सेवा के प्रति पूरी तरह समर्पित है। समाज के लोगों द्वारा तन-मन-धन से सहयोग करते हुए गौशाला की व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है। समिति का कहना है कि सामाजिक सहयोग से गौशाला में लगातार विकास कार्य और व्यवस्थाओं में सुधार किया जा रहा है।

टिकरिया के पास गोवंश की मौत को गौशाला से जोड़ने पर सवाल

समिति अध्यक्ष रानू जैन ने आरोप लगाया कि टिकरिया के नजदीक हुई गोवंश की मौत को बार-बार गौशाला से जोड़कर प्रस्तुत करना कुछ लोगों की फितरत बन गई है। उन्होंने कहा कि किसी भी घटना को गौशाला से जोड़ने से पहले उसकी वास्तविकता की जांच होना जरूरी है। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि बदनाम करने वालों के सामने प्रशासन द्वारा उच्च स्तरीय भौतिक सत्यापन कराया जाएगा, जिससे वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

समिति ने प्रशासन से मांग की है कि गौशाला की व्यवस्थाओं, गोवंश की संख्या, चारे-पानी, उपचार एवं अन्य व्यवस्थाओं का निष्पक्ष और उच्च स्तरीय भौतिक सत्यापन कराया जाए। समिति का कहना है कि सत्यापन के बाद गौशाला की वास्तविक स्थिति स्वयं स्पष्ट हो जाएगी और भ्रामक आरोपों पर भी विराम लगेगा।