खिरकिया। भारतीय जनता पार्टी परिवार और कार्यकर्ताओं के प्रिय मार्गदर्शक, वरिष्ठ नेता कृष्णकांत बिल्लौरे का गुरुवार दोपहर इंदौर के एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया। वे 67 वर्ष के थे। लगभग एक सप्ताह पूर्व उन्हें पैरालिटिक अटैक आया था, जिसके बाद से वे अस्पताल में जीवन और मृत्यु से संघर्ष कर रहे थे। उनके चले जाने से पूरे भुआना क्षेत्र, नार्मदीय ब्राह्मण समाज और भाजपा संगठन में शोक की लहर दौड़ गई है।

संगठन के स्तंभ और कार्यकर्ताओं के प्रणेता
कृष्णकांत बिल्लौरे ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के एक निष्ठावान कार्यकर्ता के रूप में की थी। वे राजनीति को पद नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम मानते थे। उन्होंने भाजपा मंडल अध्यक्ष से लेकर जिला महामंत्री तक के दायित्वों को जिस सहजता और कुशलता से निभाया, वह आज की पीढ़ी के कार्यकर्ताओं के लिए एक मिसाल है।जिला सहकारी बैंक में संचालक सदस्य के रूप में अपनी भूमिका निभाते हुए उन्होंने सदैव आम जनता और किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा।
वे उस दौर के शीर्ष नेताओं में शामिल थे, जब राजनीति में सादगी और विचारों की प्रतिबद्धता सबसे बड़ी ताकत मानी जाती थी। कार्यकर्ताओं के बीच उनकी पकड़ इतनी गहरी थी कि हर छोटा-बड़ा कार्यकर्ता उनसे सीधे दिल से जुड़ा महसूस करता था।नार्मदीय ब्राह्मण समाज का यह तेजस्वी चिराग गुरुवार को बुझ गया। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्पित कार्यकर्ता अशोक बिल्लौरे के छोटे भाई तथा रेडीमेड वस्त्र व्यवसायी शशिकांत बिल्लौरे के बड़े भाई थे।
कृष्णकांत का असमय चले जाना केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि उस समूचे भाजपा कार्यकर्ता परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसने उनके संरक्षण में राजनीति के संस्कार सीखे। उनका अंतिम संस्कार आज शुक्रवार सुबह दस बजे स्थानीय मुक्तिधाम में किया जाएगा।