​खिरकिया। नगरी क्षेत्र के राहवासी इलाके में अब शांति से रहने लायक नहीं बचे हैं। रिहायशी इलाकों में धड़ल्ले से चल रही व्यावसायिक और औद्योगिक गतिविधियों ने आम नागरिकों का जीना मुहाल कर दिया है। जहाँ केवल मकान होने चाहिए थे, वहाँ अब वर्कशॉप, गोदाम, शोर-शराबा करने वाली मशीनें और व्यावसायिक धंधे फल-फूल रहे हैं। सवाल यह उठता है कि क्या खिरकिया नगर परिषद में कानून नाम की कोई चीज़ बची है या फिर जिम्मेदार अफसरों ने अपनी आँखें मूंद ली हैं?

​नगर पालिका एक्ट की उड़ रही धज्जियां

मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम और मास्टर प्लान के नियमों को ताक पर रखकर आवासीय क्षेत्रों में कारखाने और दुकानें चलाई जा रही हैं। नियमों के मुताबिक, आवासीय कॉलोनी में बिना भू-उपयोग परिवर्तन और वैध लाइसेंस के किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि चलाना कानूनन अपराध है। भारी औद्योगिक गतिविधियों और प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर तो सख्त पाबंदी है। इसके बावजूद शहर की गलियों में दिन-रात शोर, भारी वाहनों का आवागमन और हादसों का खतरा बना रहता है।

​नागरिक परेशान, प्रशासन मेहरबान!
आवासीय क्षेत्रों में चल रहे इन अवैध कारोबारों के कारण आम लोगों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।​दिन-रात का शोर और प्रदूषण से बुजुर्गों, मरीजों और बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है। व्यावसायिक वाहनों की आवाजाही से गलियों में दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है। इन वाहनों का सड़क पर कब्जा हो जाता है और ट्रैफिक जाम की स्थिति आए दिन बनती है। इसके अलावा रिहायशी इलाकों में ज्वलनशील पदार्थों या भारी मशीनों का उपयोग किसी बड़े हादसे को दावत दे रहा है।

​क्या सांठगांठ का खेल है?

जब नियम स्पष्ट हैं कि रिहायशी इलाकों में औद्योगिक काम नहीं हो सकते, तो फिर नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारी अब तक खामोश क्यों हैं? क्या बिना लेन-देन और प्रशासनिक संरक्षण के इतना बड़ा अवैध तंत्र खड़ा हो सकता है? शिकायत मिलने के बावजूद केवल खानापूर्ति करना यह दर्शाता है, कि नगर परिषद की मंशा शहर को व्यवस्थित करने की नहीं, बल्कि अवैध गतिविधियों को शह देने की है। यदि नगर परिषद प्रशासन ने जल्द ही इन अवैध व्यावसायिक व औद्योगिक गतिविधियों पर सख्त रुख अपनाते हुए तालाबंदी और जब्ती की कार्रवाई नहीं की, तो रहवासियों को मजबूरन अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा और जनआंदोलन का रास्ता चुनना होगा।

 

क्या है नियम

मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1961 के तहत आवासीय क्षेत्रों में बिना अनुमति व्यावसायिक या भारी औद्योगिक गतिविधियां संचालित करना पूर्णतः अवैध एवं नियम विरुद्ध (गैर-कानूनी) है।

नगर तथा ग्राम निवेश (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) और नगर परिषद के नियमों के अनुसार आवासीय जमीन का उपयोग केवल निवास के लिए ही किया जा सकता है।व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भू-उपयोग परिवर्तन  और नगर परिषद से व्यापार लाइसेंस लेना अनिवार्य है। ध्वनि, वायु या जल प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक गतिविधियां (मास्टर प्लान के अनुसार) आवासीय क्षेत्रों में पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। लेकिन नगर परिषद खिरकिया द्वारा इस पर कार्रवाई नहीं की जा रही है, तो यह प्रशासनिक लापरवाही का विषय है।


इनका कहना हैं...

इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों से मार्गदर्शन प्राप्त कर नगरी प्रशासन विभाग के नियम अनुसार जांच की जाएगी।
 
अखिल राय, सीएमओ, नगर परिषद खिरकिया