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खिरकिया। केन्द्र और प्रदेश सरकार देशभर में हर तरफ स्वच्छता को बढ़ावा दे रही है। हर संस्थान को पूरी तरह से साफ एवं स्वच्छ रखने स्वच्छ भारत अभियान को बढ़ावा दिया जा रहा है। वहीं खिरकिया कृषि उपज मंडी में स्वच्छ भारत अभियान को पलीता लगाया जा रहा है। मंडी परिसर में हर तरफ गंदगी फैली हुई है। कहीं कचरे के ढेर हैं तो कहीं गंदा पानी फैल रहा है। मंडी के चारों तरफ जंगली पौधे उग गए हैं। जिनेक कारण जहरीले कीड़ों के पनपने से किसानों, हम्मालों एवं व्यापारियों की जान को भी खतरा बना हुआ है। किसानों की उपज की तौल के टीन शेड सहित अन्य स्थानों पर फैली गंदगी को साफ कराने में मंडी प्रशासन कोई रूचि नहीं दिखा रहा है। आलम यह है कि खिरकिया की कृषि उपज मंडी में गंदगी और बदबू से किसानों, हम्मालों एवं व्यापारियों सहित आमजन को परेशानी हो रही है। मंडी परिसर में फैली गंदगी से मंडी प्रशासन की स्वच्छता व्यवस्था की भी पोल खुल रही है और सफाई व्यवस्था भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जबकि मंडी में साफ-सफाई पर हर महीने 50 से 80 हजार रूपए खर्च किए जा रहे हैं। मंडी में एक सरकारी, दो दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी एवं एक माली की ड्यूटी है। परंतु फिर भी मंडी में व्यवस्था बिगड़ी हुई है। मंडी के प्रागंण प्रभारी प्रेमकुमार उज्जैनिया की लापरवाही से यह स्थिति बनी हुई है। वे मंडी में साफ-सफाई व्यवस्था को सुचारू रखने की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। जानकारी के अनुसार मंडी परिसर में जगह-जगह कचरे के ढेर, जंगली घास एवं पौधे और गंदगी साफ दिखाई दे रही है। मंडी परिसर में सफाई व्यवस्था के नाम पर खर्च होने के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात अलग दिखाई दे रहे हैं। सूत्रों के अनुसार फिनाइल, एसिड, झाडू सहित सफाई सामग्री के नाम पर बड़े-बड़े बिल निकाले जा रहे हैं। इसके बावजूद मंडी परिसर में गंदगी का अंबार लगा हुआ है।
प्रसाधान केन्द्र भी गंदगी से है सराबोर
कृषि उपज मंडी में प्रतिदिन सैंकड़ों की संख्या में किसानों की आवाजाही है। यहां स्थित प्रसाधान केन्द्र का मंडी आने वाले किसानों के अलावा आमजन, व्यापारी एवं हम्माल भी उपयोग करते हैं। परंतु प्रसाधान केन्द्र पूरी तरह से गंदगी से सराबोर है। प्रसाधान केन्द्र में फैली गंदगी और बदबू से सभी को परेशानी होती है। परंतु मजबूरी में लोगों को गंदगी से सराबोर प्रसाधान केन्द्र का उपयोग करना पड़ रहा है। कई महीनों से प्रसाधान केन्द्रों की भी पूरी तरह से सफाई नहीं हुई है।
सफाई कर्मचारी से सोरन भी इकट्ठी कराने की चर्चा
मंडी परिसर में सफाई कर्मचारियों से सफाई के साथ-साथ सोरन इकठ्ठा कराने का काम भी कराया जा रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मंडी में सोरन इकठ्ठा करने के लिए अलग से कर्मचारी लगाए गए हैं और इसके लिए भुगतान किए जाने की बात भी सामने आ रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब मंडी में सफाई व्यवस्था के लिए कर्मचारी और संसाधन उपलब्ध हैं, तो फिर परिसर में जगह-जगह कचरा और गंदगी क्यों दिखाई दे रही है। किसानों और मंडी में आने वाले लोगों का कहना है कि कृषि उपज मंडी जैसी महत्वपूर्ण जगह पर स्वच्छता व्यवस्था दुरुस्त रहना जरूरी है। गंदगी के कारण किसानों और व्यापारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्वच्छता व्यवस्था बिगड़ी होने के संबंध में मंडी के नवागत सचिव राजेश साकेत से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनके द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया। अब देखना होगा कि कलेक्टर, एसडीएम एवं मंडी बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी सफाई व्यवस्था और सोरन इकठ्ठा करने के मामले में क्या कार्रवाई करते हैं।