नीमच। जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती ने अफीम तौल और जांच प्रणाली को लेकर नारकोटिक्स विभाग की जड़ों पर प्रहार करते हुए इसे भ्रष्टाचार का एक बड़ा नेटवर्क करार दिया है। बाहेती ने कड़े शब्दों में कहा कि कांग्रेस पार्टी जो आरोप महीनों से लगा रही थी, आज उन आरोपों को सत्ता पक्ष के अपने ही राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर के पत्र ने पूरी तरह सच साबित कर दिया है। सांसद गुर्जर द्वारा नारकोटिक्स कमिश्नर को लिखा गया पत्र इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि विभाग की जांच प्रणाली पूरी तरह फेल हो चुकी है और मशीनों की खराबी व पुराने पड़ चुके परीक्षण के तरीकों ने किसानों के पसीने की कमाई को मिट्टी में मिलाने का काम किया है।
जिलाध्यक्ष तरुण बाहेती ने भाजपा के राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर पत्र के हवाला देते हुए कहा की 12 अप्रैल 2026 को जारी परिणामों में भारी विसंगतियां थीं और विभाग खुद स्वीकार कर रहा है कि कई सैंपल की रिपोर्ट संदिग्ध पाई गई है। यह बेहद गंभीर मामला है कि जिस अफीम को तौल केंद्रों पर मशीनों द्वारा तकनीकी रूप से स्टैंडर्ड (STD) श्रेणी में सही पाया गया था, उसी अफीम को बाद में विभाग ने किसानों के मोबाइल पर संदेश भेजकर ‘हल्का’ और ‘मॉर्फीन की कमी’ वाला बता दिया। यह सीधे तौर पर किसानों की आंखों में धूल झोंकने जैसा है क्योंकि जब एक ही अफीम के दो अलग-अलग जांच परिणाम सामने आ रहे हैं, तो यह साफ है कि कहीं न कहीं पर्दे के पीछे कोई बड़ा खेल चल रहा है जिससे किसानों के पट्टे और उनकी आर्थिक स्थिति खतरे में पड़ गई है।
बाहेती ने विभाग की दोहरी नीति को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सरकार भुगतान तो गाढ़ता के आधार पर दे रही है लेकिन पट्टे की पात्रता के लिए मॉर्फीन को आधार बना रही है, जो कि सरासर अन्याय और किसानों का शोषण है। जिले का अन्नदाता आज मानसिक दबाव और भारी असंतोष के दौर से गुजर रहा है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष बाहेती ने मांग की है कि किसानों की आपत्तियों के आधार पर कम मॉर्फीन वाले गांवों के अफीम सैंपलों की दोबारा उच्च तकनीक वाली मशीनों से पारदर्शी तरीके से जांच कराई जाए। इसके साथ ही जिन किसानों के साथ अन्याय हुआ है, उन्हें अपनी बात रखने और अपील करने का उचित अवसर दिया जाना चाहिए ताकि कोई भी किसान व्यवस्था की भेंट न चढ़े।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस पूर्व में ही किसानों की आवाज को नारकोटिक्स डिप्टी कमिश्नर से मुलाकात के दौरान उठा चुकी है। लेकिन नई पुरानी अभी तक किसानों को कोई ठोस जवाब नारकोटिक्स विभाग से नहीं मिला है जो उचित नहीं है। बाहेती ने अपनी मांग दोहराते हुए कहा कि इस गंभीर मामले में नारकोटिक्स विभाग को स्पष्टीकरण जारी कर इस मामले में किसानों को संतुष्ट करना चाहिए अन्यथा यही माना जाएगा की नारकोटिक्स में किसानों को परेशान करना सबब बन चूका हैं।
-किसान बेहाल,आखिर कहाँ ‘भूमिगत’ हैं सांसद सुधीर गुप्ता?
अफीम किसानों पर बढ़ते अत्याचार और नारकोटिक्स विभाग की मनमानी को लेकर जिला कांग्रेस ने क्षेत्रीय सांसद सुधीर गुप्ता की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार किया है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने सांसद की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए पूछा है कि जब आज क्षेत्र का किसान नारकोटिक्स विभाग की तानाशाही से पीड़ित है और अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है, तब सांसद सुधीर गुप्ता आखिर कहाँ छिपे हुए हैं? किसान हित के इतने संवेदनशील और बड़े मुद्दे पर सांसद का ‘भूमिगत’ हो जाना उनकी संदिग्ध कार्यप्रणाली को उजागर करता है। जब नीति निर्धारण की बैठकों में किसानों का पक्ष रखने की जरूरत होती है, तब सांसद का मौन रहना क्षेत्र के अन्नदाताओं की पीठ में छुरा घोंपने जैसा है। जिला अध्यक्ष ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आखिर सांसद इस मुद्दे पर बोलने से क्यों बच रहे हैं? उनकी यह रहस्यमयी चुप्पी इशारा करती है कि वे किसानों के बजाय व्यवस्था की खामियों के साथ खड़े हैं। जनप्रतिनिधि का काम जनता की आवाज बनना होता है, लेकिन सुधीर गुप्ता ने चुप्पी साधकर किसानों को उनके हाल पर छोड़ दिया है, जो कि सरासर विश्वासघात है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष बाहेती ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि नारकोटिक्स विभाग की प्रताड़ना नहीं रुकी और प्रक्रिया में पारदर्शिता लाकर किसानों को न्याय नहीं दिया गया, तो कांग्रेस पार्टी चुप नहीं बैठेगी। अब यह लड़ाई सड़कों पर लड़ी जाएगी और कांग्रेस एक ऐसा व्यापक जनआंदोलन खड़ा करेगी जो इस सोई हुई सरकार और ‘भूमिगत’ सांसद को जगाने का काम करेगा।