103 वर्ष की आयु में पुजारी धर्मदास पटेरिया का निधन, बहन से किया वादा निभाने के लिए जीवन भर नहीं की शादी, भांजों ने डीजे के साथ निकाली अंतिम यात्रा

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जतारा। जनपद पंचायत पलेरा के ग्राम पहाड़ी बुजुर्ग के निवासी और मंदिर के पुजारी रहे पंडित धर्मदास पटेरिया का 103 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से गांव सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई। पंडित धर्मदास पटेरिया का जन्म 1 फरवरी 1924 को ग्राम पहाड़ी बुजुर्ग में हुआ था। वे लंबे समय से गांव के मंदिर में पुजारी के रूप में सेवा दे रहे थे और धार्मिक प्रवृत्ति तथा सादगी भरे जीवन के लिए पूरे क्षेत्र में सम्मानित थे।

बताया जाता है कि उनकी एक बहन थी। बहन और बहनोई के निधन के बाद उनके दोनों बेटे काफी छोटे थे। ऐसे कठिन समय में धर्मदास पटेरिया ने अपने भांजों को सहारा दिया और उन्हें अपनी संतान की तरह पालने-पोसने का संकल्प लिया। उन्होंने बहन को अंतिम विदाई देते समय मन ही मन प्रण लिया कि वे अपने दोनों भांजों को अपनी औलाद की तरह पालेंगे और जीवन भर उनका साथ देंगे।

अपने इस संकल्प को निभाने के लिए उन्होंने जीवन भर विवाह नहीं किया और पूरी जिम्मेदारी के साथ दोनों भांजों का पालन-पोषण किया। उन्हें पढ़ाया-लिखाया और नौकरी तक लगवाने में सहयोग किया। इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी करीब 40-40 एकड़ से अधिक जमीन, घर-मकान और अपनी समस्त संपत्ति भी दोनों भांजों के नाम कर दी।

बुधवार को जब उन्होंने अंतिम सांस ली तो पूरे गांव में शोक का माहौल छा गया। उनके भांजों और परिजनों ने पूरे सम्मान के साथ उनकी अंतिम यात्रा डीजे के साथ निकाली, जिसमें गांव और आसपास के बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
जब उनकी अंतिम यात्रा गांव की गलियों से गुजरी तो हर किसी की आंखें नम थीं। ग्रामीणों की जुबान पर एक ही बात थी कि आज की स्वार्थ भरी दुनिया में पुजारी धर्मदास पटेरिया ने अपने धर्म और रिश्ते की मर्यादा को जीवन भर निभाकर एक मिसाल पेश की है।

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