उज्जैन से अजय नवरंग
सबसे बड़ी खबर मध्यप्रदेश से, जहां डॉ. मोहन यादव ने गेहूं उपार्जन व्यवस्था की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि गेहूं खरीदी के दौरान किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए सभी जिलों के कलेक्टर्स को उपार्जन केंद्रों पर बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए गेहूं उपार्जन का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया है। साथ ही अब छोटे, सीमांत, मध्यम और बड़े सभी वर्ग के किसानों के लिए स्लॉट बुकिंग की सुविधा शुरू कर दी गई है। उपार्जन केंद्रों की क्षमता भी बढ़ाई गई है, जहां अब प्रतिदिन 1000 क्विंटल के स्थान पर 2250 क्विंटल तक गेहूं खरीदी की जा सकेगी। वहीं स्लॉट बुकिंग की अंतिम तारीख को भी बढ़ाकर 9 मई कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि सभी केंद्रों पर तौल कांटे, हम्माल, छाया और पीने के पानी की समुचित व्यवस्था हो। साथ ही किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए और परिवहन व भंडारण व्यवस्था की रोजाना समीक्षा की जाए इसके अलावा चना और मसूर की खरीदी मंडी के शेड के अंदर करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि असमय बारिश से फसल को नुकसान न हो।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश में बारदानों की पर्याप्त व्यवस्था की गई है और हर उपार्जन केंद्र पर कम से कम 7 दिन की खरीदी के लिए बारदान उपलब्ध रहेगा। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि गेहूं खरीदी का लक्ष्य 100 लाख मीट्रिक टन करने का निर्णय किसानों के हित में है। फिलहाल प्रदेश में 3 हजार 516 उपार्जन केंद्र संचालित हैं और लाखों किसान इस प्रक्रिया से जुड़ चुके हैं। तो कुल मिलाकर सरकार का फोकस साफ है—किसानों को बेहतर सुविधा, समय पर भुगतान और बिना परेशानी के गेहूं खरीदी।