सीहोर जिले के भैरूंडा तहसील अंतर्गत ग्राम सिंहपुर से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नसबंदी ऑपरेशन के बाद एक महिला की मौत हो गई, लेकिन मामला तब और सनसनीखेज हो गया जब अंतिम संस्कार के बाद अस्थियों के साथ राख में जली हुई सर्जिकल कैंची मिली। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों की घोर लापरवाही के चलते महिला के पेट में कैंची छोड़ दी गई, जिससे संक्रमण फैला और अंततः महिला की मौत हो गई। इस घटना में तीन मासूम बच्चों — तीन साल, पंद्रह माह और एक नवजात — के सिर से माँ का साया उठ गया।
परिजनों का कहना है कि मृतका का दो जगह ऑपरेशन हुआ था, इसके बावजूद समय रहते लापरवाही सामने नहीं आई। उनका आरोप है कि नसबंदी के दौरान आंत की नस कट गई, जिससे शरीर में ज़हर फैलता गया। इलाज के दौरान महिला की हालत लगातार बिगड़ती गई और उसने दम तोड़ दिया। परिजन इसे सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि हत्या करार दे रहे हैं।
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने ऑपरेशन करने वाली महिला डॉक्टर का भैरूंदा अस्पताल से इच्छावर अस्पताल तबादला कर दिया, जिसे लेकर परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि तबादला कोई सजा नहीं, बल्कि दोषियों को संरक्षण देने जैसा है। परिजनों ने दोषी डॉक्टर को तत्काल बर्खास्त करने, मेडिकल लाइसेंस रद्द करने, हत्या का मुकदमा दर्ज करने और पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की है। साथ ही तीनों बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और परवरिश की पूरी जिम्मेदारी सरकार से उठाने की मांग की गई है।
इस पूरे मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी तक सामने नहीं आई है, लेकिन श्मशान से मिला यह सर्जिकल यंत्र कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है। सवाल यह भी है कि ऑपरेशन के बाद औजारों की गिनती क्यों नहीं की गई और ओटी में मौजूद पूरी टीम की जिम्मेदारी अब तक तय क्यों नहीं हुई। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही यह कैंची स्वास्थ्य तंत्र की लापरवाही की भयावह तस्वीर पेश कर रही है।