‘खुशियों की दांस्ता’, डिजिटल सेवा केंद्र खोलकर दुलारी यादव ने चुनी आत्मनिर्भरता की राह, सही कार्यशैली और ईमानदारी से क्षेत्र में बनाई विश्वसनीय पहचान

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अनूपपुर 27 अप्रैल 2026/ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और हकदर्शक आकांक्षा प्रोजेक्ट की टीम ने मुझे मेरे परिवार को अंधेरे से निकालकर आत्मनिर्भरता की रोशनी दी है अब मैं अपना केवल अपने परिवार का सहारा ही नही हूं बल्कि समाज की सेवा भी कर पा रही हूं यह कहना है सीआरपी सखी एवं डिजिटल सेवा प्रदाता आकांक्षा प्रोजेक्ट का लाभ लेकर आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर दुलारी यादव का जो जनपद अनूपपुर के ग्राम छोहरी की निवासी हैं
ग्रहणी से डिजिटल सखी तक का सफर उन्होंने ऐसे ही नहीं तय किया बल्कि इसके लिए उन्होंने निष्ठा, समर्पण और अपना श्रम देकर अपनी पहचान स्थापित की है।
आज से 1 साल पहले तक दुलारी यादव जी का जीवन घर की चार दिवारी तक सीमित था पति शिक्षित थे लेकिन दुलारी जी का स्वास्थ्य ठीक ना रहने के कारण वह बाहर काम पर नहीं जा पा रहे थे गांव में ही मजदूरी कर जैसे तैसे घर चलता था आर्थिक स्थिति इतनी चुनौती पूर्ण थी कि बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलाना एक बड़ा संघर्ष था।
परिस्थिति जन्य स्थिति में उन्होंने बदलाव की राह चुनी दुलारी यादव को बंदनी स्व सहायता समूह से जुड़कर हकदर्शक और योजना सखी के बारे में जानकारी मिली 24 फरवरी 2026 को अनूपपुर के नजदीकी ग्राम फुनगा में हकदर्शक आकांक्षा प्रोजेक्ट के यशवेंद्र सिंह से मुलाकात ने उनके जीवन की दिशा बदल दी घर में सिर्फ एक मोबाइल होने के बावजूद उन्होंने डिजिटल उद्यमी बनने का साहस दिखाया

प्रशिक्षण और तकनीकी विकास

अनूपपुर में आयोजित सीएफआइजी आकांक्षा प्रोजेक्ट के तहत डिजिटल ट्रेनिंग ली यशवेंद्र सर के मार्गदर्शन में उन्होंने फील्ड जाकर काम सीखा और जब भी जरूरत पड़ी गूगल मीट के माध्यम से ऑनलाइन ट्रेंनिंग के माध्यम से समस्याओं का तुरंत समाधान किया आज वे और उनके पति एक टीम की तरह गांव-गांव जाकर कैंप लगते हैं।

बहुआयामी डिजिटल सेवाएं करा रही है मुहैया

अब अपने डिजिटल सेवा केंद्र के माध्यम से पैन कार्ड,ई-श्रम, आयुष्मान (आभा) संबल कार्ड, बैंक खाता खोलने और बिजली बिल जैसे काम कर रही हैं जिससे उन्हें आर्थिक मजबूती के साथ-साथ एनआरएलएम के सीआरपी सखी के रूप में 3 से ₹5 व आकांक्षा प्रोजेक्ट के माध्यम से 5 से ₹8 हजार मासिक की आमदनी हो रही है।
आज उनके पास अपना लैपटॉप और प्रिंटर है हाल ही में उन्होंने एक नया मोबाइल भी खरीदा है जिसकी किस्त अपनी स्वयं की मेहनत की कमाई से दे रही है दुलारी यादव अब समाज का भरोसा और गांव के लोगों का मान है उनकी सही कार्यशैली और ईमानदारी ने उन्हें पूरे क्षेत्र में एक विश्वसनीय पहचान दिलाई है।

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