सांवेर से संतोष व्यास की रिपोर्ट—
स्वच्छ भारत अभियान के दावों के बीच सांवेर जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कछालिया में हालात बद से बदतर हो चुके हैं। गांव की गलियों में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं, वहीं नालियां चोक होने से गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई वार्डों में पानी घरों तक घुस रहा है और ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच द्वारा मनमानी की जा रही है और सफाई के नाम पर आने वाला बजट खर्च नहीं किया जा रहा। सफाईकर्मी महीनों से गांव में नहीं आए हैं, जिससे स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है मुख्य मार्ग पर दुकानों के सामने भी गंदगी का अंबार देखा जा सकता है। गंदगी और जलभराव के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी खतरनाक बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।
गौरतलब है कि पंचायती राज अधिनियम के तहत हर ग्राम पंचायत को नियमित सफाई, कचरा प्रबंधन और नालियों की सफाई सुनिश्चित करना अनिवार्य है, जिसके लिए केंद्र और राज्य सरकार से अलग बजट भी मिलता है। इसके बावजूद जिम्मेदारों की अनदेखी के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।